ऑस्टियोपोरोसिस क्या है? मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या क्यों बढ़ जाती है ?

Problem of osteoporosis increase after menopause

Synopsis: ऑस्टियोपोरोसिस क्या है? ऑस्टियोपोरोसिस के कारण क्या है? मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या क्यों बढ़ जाती है ?

यह तो हम सभी जानते है कि महिलाओं में पीरियड्स का आना एक कॉमन प्रॉब्लम है जो हर महीने आते है। पर इस माहवारी के दौरान वह बहुत से मूड स्विंग्स को लेकर गुजरती है जिसमे कभी पेट दर्द , कभी कमर दर्द , स्तनों में दर्द महसूस होना , सूजन सा लगना ,पेट फूलना आदि शामिल है।

आमतौर पर यह समस्या महिलाओं में 17 साल की उम्र से लेकर 50 साल तक के हो जाने के दौरान बनी रहती है। पर आज के समय में 50 तक लेडीज पहोचती भी नहीं 38 या 45 की उम्र में आते ही मेनोपॉज (menopause) बंद हो जाता है। जब महिला 45 से 50 की उम्र तक आती है इस बीच बहुत से हार्मोनल बदलाव उनके भीतर होते है जो इमोशनल और फिजिकल तौर पर होते रहते है।

मेनोपॉज के बाद “ऑस्टियोपोरोसिस” की समस्या

 (Problem of Osteoporosis)

पीरियड्स बंद हो जाने के दौरान एस्ट्रोजन हर्मोंन बनना बंद हो जाता है। जिसकी वजह से बैचेनी, चिड़चिड़ापन, हड्डियों का कमजोर होना और फेस पर गालो के आस-पास ज़्यादा बाल का आ जाना इमोशनली तौर पर खुद को काफी कमजोर महसूस करने लगता हैं। अपनी सेहत को लेकर अगर महिलाएं मेनोपॉज से पहले या उस दौरान सतर्क हो जाती है तो इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हड्डियों के कमजोर होने की इस स्थिति को ही “ओस्टियोपोरसिस” कहते हैं।

एस्ट्रोजन हर्मोंन क्या होता है ?

(What is estrogen hormone)

एस्ट्रोजन हर्मोंन एक ऐसा महत्वूर्ण हार्मोन होता है जो महिलाओं में उत्पन्न होता है जिसकी वजह से शरीरिक एवं प्रजनन प्रक्रियाएं संभव हो पाती है। यह एस्ट्रोजन हार्मोन मुख्यतः अंडाशय में उत्पन्न होता है। हालांकि छोटी मात्रा में यह अधिवृक्क ग्रंथियों (adrenal glands) और वसा कोशिकाओं (fat cells) द्वारा भी उत्पादित होता है। इस इम्पोर्टेन्ट हार्मोन की वजह से महिलाये एक्टिव रहकर सारे फिजिकल एवं मेन्टल काम आसानी से कर पाती है।

ऑस्टियोपोरोसिस क्या है ?

(What is osteoporosis)

जैसा की हमने आपको बताया हड्डियों का कमजोर होना ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है , जिससे वे कमजोर और भंगुर हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप हड्डियों में फ्रेक्चर होने की समस्या बढ़ जाती है और आसानी से टूट भी सकती हैं, विशेष रूप से कूल्हे, कलाई और रीढ़ की हड्डियाँ। यह समस्या अक्सर मेनोपॉज के बाद महिलाओं में अधिक देखी जाती है।

ऑस्टियोपोरोसिस के कारण

(Osteoporosis hone ke karn in Hindi)

 

1.

एस्ट्रोजन के स्तर का कम होन

मेनोपॉज के दौरान और बाद में, एस्ट्रोजन हार्मोन  का स्तर काफी घट जाता है। जिसकी वजह से बॉडी से एस्ट्रोजन कम होने लगता है जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। इसकी कमी से हड्डियों के घनत्व में कमी आने लगती है, जिससे वे कमजोर हो जाती हैं।

2.

शरीर में पोषक तत्वों की कमी

 

हड्डियों में विटामिन्स डी ,बी 12 , प्रोटीन और कैल्शियम की कमी भी हड्डियों को कमजोर कर सकती है। ये दोनों पोषक तत्व हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक होते हैं।

3.

फिसिकल एक्टिविटी की कमी

हजैसे-जैसे उम्र बढ़ती है शरीर का वजन भी बढ़ने लगता है अगर नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि में कमी की तो हड्डियों पर पर्याप्त दबाव नहीं पड़ता, जिससे उनकी मजबूती घट जाती है।

4.

जीवनशैली को प्रभावित करने वाले कारक

ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को बढ़ाने में धूम्रपान, अधिक शराब का सेवन, और संतुलित आहार की कमी आदि शामिल है।

5.

पारिवारिक इतिहास

अगर परिवार में किसी को पहले से ऑस्टियोपोरोसिस की समयसा है, तो इसका खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

ऑस्टियोपोरोसिस के होने के ये सभी प्रमुख कारक हैं। अगर आपको ज्यादा तकलीफ हो रही हो तो आप डॉक्टर्स से भी परामर्श ले सकते है।

ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव के उपाय

(Ways to prevent osteoporosis in Hindi)

 

1.

संतुलित आहार का सेवन करें

ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर आहार का सेवन करें। दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, और मछली इसमें मददगार साबित हो सकते हैं।

2.

नियमित व्यायाम जरूर करें

अच्छा होगा अगर आप वजन उठाने वाले व्यायाम और वॉकिंग करें जिससे हड्डियां मजबूत बनेंगी और शरीर बैलंस्ड रहेगा।

3.

धूम्रपान और शराब से बचाव है जरुरी

धूम्रपान और अधिक शराब के सेवन से खुद को बचाएं बचें, क्योंकि ये हड्डियों को कमजोर कर सकते हैं। और इनका अधिक सेवन पथरी और किडनी पर असर डाल सकता है।

4.

चिकित्सीय सलाह जरूर लें

हो सके तो हर महीने नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवाएं और उनकी सलाह के अनुसार चलें।

5.

सप्लीमेंट्स का सेवन डॉक्टर्स के कहने पर लें

अगर आपको आहार से पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी नहीं मिल रहा हो, तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स जरूर लें।

मेनोपॉज के बाद, महिलाओं को अपनी हड्डियों की सेहत का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए और उपरोक्त उपायों का पालन करना चाहिए जिससे ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम किया जा सकता है।

प्राइवेट पार्ट में होने वाली खुजली, जलन और कालापन रोकने के 10 घरेलू उपाय

Home remedies for Vaginal Itching In Hindi

प्राइवेट पार्ट में होने वाली खुजली (Vaginal Itching), जलन और कालापन रोकने के 10 घरेलू उपाय

प्राइवेट पार्ट जिसके बारे में बात करने में अक्सर महिलाएं हिचकिचाती है पर इस विषय पर बात करना जरुरी है क्यों कि प्राइवेट पार्ट हमारी बॉडी का एक अहम हिस्सा है जिसकी साफ-सफाई रखना हमारी ज़िम्मेदारी है पर कई बार न चाहते हुए भी ऐसा हो जाता है कि प्राइवेट पार्ट वाली जगह पर फंगस इन्फेक्शन हो जाता है जिससे योनि में सूजन, खुजली और कालापन सा दिखाई देने लगता है ऐसे में हम क्या उपाय अपनाये जिससे यह प्रॉब्लम जल्द ही खत्म हो जाये और हमे डॉक्टर्स के पास भी न जाना पड़े।

प्राइवेट पार्ट में खुजली और जलन हो तो क्या करें?

प्राइवेट पार्ट में खुजली को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

  1. अपने प्राइवेट पार्ट क्षेत्र को साफ और सूखा रखें।
  2. हल्के साबुन का इस्तेमाल करें और अच्छी तरह धो लें। नहाने के बाद अपने प्राइवेट पार्ट को पूरी तरह से सूखा लें। प्राइवेट पार्ट को ज़्यादा साफ़ करने से बचें।
  3. नहाने और तैरने के बाद अपने कपड़े अच्छी तरह से सुखा लें।
  4. लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से बचें।
  5. ढीले, प्राकृतिक फाइबर वाले अंडरवियर और कपड़े पहनें।
  6. यदि आपको या आपके साथी को कोई संक्रमण हो, असुरक्षित यौन संबंध से बचें।
  7. गुदा से योनि में बैक्टीरिया प्रवेश से रोकने के लिए हमेशा आगे से पीछे की ओर पोंछें।
  8. सुगंधित टैम्पोन या सैनिटरी पैड से बचें।
  9. वाशिंग मशीन में अत्यधिक मात्रा में डिटर्जेंट का उपयोग करने से बचें।
  10. यदि आपको संदेह है कि योनि स्नेहक खुजली को बढ़ा सकता है, तो स्नेहन के सर्वोत्तम विकल्पों के बारे में चर्चा करें।
  11. प्राइवेट पार्ट में अत्यधिक शेविंग और खरोंच से बचें।
  12. बिना डॉक्टर की पर्ची के मिलने वाली खुजली अवरोधक दवाओं से दूर रहें, क्योंकि ये उत्पाद लम्बे समय में खुजली को बदतर बना सकते हैं।
  13. अपनी योनि में स्वस्थ बैक्टीरिया बनाए रखने के लिए संतुलित आहार खाएं।

आइये जानते है

प्राइवेट पार्ट में खुजली रोकने के असरदार घरेलू उपाय

  1. नारियल तेल की मदद से प्राइवेट पार्ट की खुजली मिटाए

अगर आपको योनि में लंबे समय से खुजली हो रही है या फिर आस-पास सूजन नज़र आ रही है तो नारियल के तेल में थोड़ी सी देसी कपूर और आधा चम्मच डेटॉल या सेवलॉन (Detol/Savelon) मिलाकर छोड़ दें।

नियमितता –

  1. इस प्रयोग को नियमित रूप से 3 से 4 दिन करें।
  2. आपकी प्राइवेट पार्ट में खुजली और सूजन की समस्या तुरंत ही हल हो जाएगी।
  3. इसमें मौजूद एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरिल और मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं जो त्वचा को आराम देने में मदद करते हैं।
  1. प्राइवेट पार्ट से कालापन हटाने के लिए दही का प्रयोग करें

    अगर आपको योनि में लंबे समय से खुजली हो रही है या फिर आस-पास सूजन नज़र आ रही है तो नारियल के तेल में थोड़ी सी देसी कपूर और आधा चम्मच डेटॉल या सेवलॉन (Detol/Savelon) मिलाकर छोड़ दें।

नियमितता –

  1. इस प्रयोग को नियमित रूप से 3 से 4 दिन करें।
  2. दही में प्रोबायोटिक्स और अच्छे बैक्टेरिया होते है जो स्किन को नरम रखने और स्वच्छ बनाने का काम करते है।
  1. एलोवेरा जेल से प्राइवेट पार्ट की मिटाये जलन ,खुजली की समस्या

    ताजा एलोवेरा जेल, चाहे जला हुआ हिस्सा हो या फिर खुजली की समस्या हो यह प्राकृतिक तौर पर जलन एवं खुजली को मिटाने का काम करता है। इतना ही नहीं यह ठंडक पहुंचाने और जलन से राहत दिलाने में मदद देता है।

  1. प्राइवेट पार्ट की खुजली और सूजन कम करने के लिए करें ठंडे संपीड़न (Cold Compress) का प्रयोग

    अगर प्राइवेट पार्ट में इर्रिटेशन और जलन की समस्या लंबे समय तक बनी हुई है तो आप Cold Compress या एक रुमाल में बर्फ रखकर इसकी हेल्प ले सकते है और सिकाई कर सकते है। इससे जलन और खुजली में राहत मिलेगी।

  1. नीम की पत्तियाँ (Neem Leaves) का इस्तमाल कर प्राइवेट पार्ट से कालापन हटाए

    प्राइवेट पार्ट को साफ़ सुथरा बनाये रखने और कीटाणु मुक्त रखने के लिए आप पानी में नीम की पत्तियाँ डालकर उबाल लें फिर इसे हल्का ठंडा हो जाने पर प्राइवेट पार्ट को अच्छे से वाश कर लें और छोड़ दें।

नियमितता

  1. इस प्रयोग को नियमित रूप 4 से 5  दिन करें।
  2. आपकी प्राइवेट पार्ट में खुजली और जलन की समस्या तुरंत ही हल हो जाएगी।
  1. बेकिंग सोडा (Baking Soda) का इस्तमाल कर प्राइवेट पार्ट की समस्या हल करें

    बेकिंग सोडा का नाम सुनकर आप भी आश्चर्य में पढ़ गए ना ?
    पर आपने सही पढ़ा… बेकिंग सोडा में अम्लता (अम्लीय) गुण विध्यमान होते है जो बैक्टीरिया को पनपने से बचाता है, इसके लिए 1-2 चम्मच बेकिंग सोडा को गुनगुने पानी में डालकर मिलाएं और उसमें 15-20 मिनट के लिए बाथटब में बैठें। यह अम्लता को संतुलित करने में मदद देता है और खुजली को कम करने में भी सहायक होता है।

  1. टी ट्री ऑयल (Tea Tree Oil) के प्रयोग से दूर करें प्राइवेट पार्ट में हो रही जलन ,खुजली और फंगस की समस्या

    स्किन (Skin) के लिए टी ट्री ऑयल बहुत जबरजस्त काम करता है इसके लिए टी ट्री ऑयल की कुछ बूँदें (जैसे नारियल तेल) के साथ मिलाएं और प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं। यह एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक तरीके से फंगल संक्रमण को ठीक करने और खुजली को कम करने में सहायक होता है।

सावधानी

  1. इसे नियमित रूप से 3 से 4 दिन करें।
  2. टी ट्री ऑयल को डायरेक्ट स्किन पर लगाने से खुद को बचाए।
  1. प्राइवेट पार्ट की स्वछता के लिए ओटमील बाथ (Oatmeal Bath) लें

    गुनगुना पानी करके बाथटब में एक कप कोलाइडल ओटमील मिला दें और उसमें 20-30 मिनट के लिए बैठ जाएं । ओटमील त्वचा को शांत करने, त्वचा को आराम देने और खुजली को कम करने में मदद करता है। यदि आप कोलाइडल ओटमील खरीदना चाहते हैं, तो निम्नलिखित स्थानों पर इसे पा सकते हैं:

ऑनलाइन स्टोर्स

(Online Stores)

Amazon: Amazon पर कोलाइडल ओटमील आसानी से उपलब्ध है। आप विभिन्न ब्रांडों और कीमतों में इसे पा सकते हैं।

Flipkart: Flipkart पर भी आप कोलाइडल ओटमील के विभिन्न विकल्प ढूंढ सकते हैं।

Nykaa: Nykaa एक ऑनलाइन ब्यूटी और हेल्थ केयर स्टोर है, जहां आप कोलाइडल ओटमील उत्पादों को पा सकते हैं।

1mg: यह एक मेडिकल स्टोर है जो स्वास्थ्य और त्वचा देखभाल उत्पादों के लिए जाना जाता है। यहाँ आप कोलाइडल ओटमील पा सकते हैं।

  1. सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar) दूर करें प्राइवेट पार्ट में हो रही जलन , खुजली और कालेपन की समस्या

    बहुत कम लोग जानते होंगे सेब का सिरका फंगल इन्फेक्शन को कम करने और हटाने के लिए रामबाण नुस्खे की तरह काम करता है इसके लिए एक कप पानी में 1-2 चम्मच सेब का सिरका मिलाएं और इस घोल से प्रभावित क्षेत्र को धोएं। इससे त्वचा का पीएच संतुलन बरकरार रखने और खुजली कम करने में मदद मिलती है।

सावधानी

  1. इसे नियमित रूप से 3 से 4 दिन करें।
  2. सेब सिरका डायरेक्ट स्किन पर लगाने से खुद को बचाए।

इन सबके आलावा

  1. गुनगुने पानी में एक बड़ा चम्मच नमक मिलाएं और प्रभावित क्षेत्र को इसमें भिगोएं। इससे जलन और संक्रमण को कम करने में मदद मिलती है क्यों कि नमक एंटीसेप्टिक गुण विध्यमान होते है जो vegina को दर्द कम करने ,सूजन हटाने और बैक्टीरिया मुक्त रखने में सहायक होता है।

इन घरेलू उपायों का उपयोग करने से खुजली, जलन, सूजन ,कालापन जैसी समस्याओं से आराम मिलता हैऔर समग्र जननांग स्वास्थ्य को ठीक करने में मदद मिल सकती है। हालाँकि, लक्षणों की निगरानी करना और आवश्यकता होने पर डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।

Reference:

  • https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/12324-sexual-health-genital-itching
  • https://www.healthshots.com/hindi/intimate-health/try-these-5-home-remedies-to-get-rid-of-vaginal-itching-in-the-monsoon/

महिलाओं में कामोत्तेजना (Sex Drive) बढ़ाने के घरेलू उपाय

Synopsis: महिलाओं में कामोत्तेजना (Sex Drive) बढ़ाने के घरेलू उपाय एवं कामेच्छा की कमी के कारण

कामुकता एक स्वाभाविक और स्वस्थ मानवीय अनुभव है। महिलाओं में कामोत्तेजना कई कारकों से प्रभावित हो सकती है, जैसे हार्मोन, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली। महिलाओं को कामेच्छा की कमी से बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं।  यदि आप अपनी कामोत्तेजना को बढ़ाने के लिए प्राकृतिक और घरेलू उपायों की तलाश कर रही हैं, तो यह लेख आपके लिए है।

महिलाओं में कामोत्तेजना:

  • मेनोपॉज के बाद, कुछ महिलाओं को एस्ट्रोजन के स्तर में कमी का अनुभव होता है, जिससे कामवासना कम हो सकती है।
  • एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी कामवासना को बढ़ाने में मदद कर सकती है।

ध्यान दें:

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये उपाय सभी महिलाओं के लिए समान रूप से प्रभावी नहीं हो सकते हैं। यदि आपको अपनी कामोत्तेजना में कोई चिंता है, तो डॉक्टर से परामर्श करना सबसे अच्छा है।

कुछ घरेलू उपाय:

  • स्वस्थ आहार:

ये आहार कामेच्छा को बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

a. शकरकंद : यौन उत्तेजना और प्रदर्शन के लिए आदर्श रक्त प्रवाह महत्वपूर्ण है। शकरकंद में पोटेशियम होता है, जो रक्तचाप को नियंत्रित करने और परिसंचरण में सुधार करने में मदद करता है । शकरकंद में मौजूद उच्च पोटेशियम सामग्री रक्त वाहिकाओं को आराम देती है, जिससे जननांग क्षेत्र में बेहतर रक्त प्रवाह होता है,और उत्तेजना और यौन प्रतिक्रिया बढ़ सकती है। शकरकंद Complex carbs का अच्छा स्रोत है जो मस्तिष्क में सेरोटोनिन (Serotonin) के स्तर को नियंत्रित करता है। सेरोटोनिन, जिसे “खुशी का हार्मोन” भी कहा जाता है, मूड स्थिरता में योगदान देता है और कामेच्छा और यौन इच्छा को बढ़ा सकता है। शकरकंद को आहार में शामिल करने से थकान से निपटने और stamina बढ़ाने में मदद मिल सकती है, जिससे अंतरंग पल अधिक आनंददायक और संतुष्टिदायक हो सकते हैं।

b. विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ (जैसे कि आमला, नींबू, और नारंगी): विटामिन सी महत्वपूर्ण एंटीऑक्सिडेंट होता है और यह आपके लिबिडो को भी बढ़ावा दे सकता है।

c. तरबूज तरबूज में एल-सिट्रुलीन होता है, जो सेक्सुअल स्वास्थ्य में भूमिका निभा सकता है। संभवतः इसे यौन कमजोरी (इरेक्टाइल डिस्फंक्शन) को नियंत्रित करने के लिए प्राकृतिक वियाग्रा के रूप में काम करता है। कामेच्छा में सुधार, रक्त प्रवाह और संचरण में सुधार कर सकता है, और तनाव को कम कर सकता है।

d. कोलेजन युक्त खाद्य पदार्थ: कोलेजन उत्पन्न होने में सहायक हो सकता है जो बाल, चमकदार त्वचा और स्वस्थ नखों के लिए लाभकारी होता है और सेक्स प्रदर्शन को बढ़ावा देता है।

e प्राकृतिक एफ़रोडीसिएक्स (जैसे कि केला और अखरोट): केला और अखरोट जैसे प्राकृतिक एफ़रोडिसिएक्स कामेच्छा को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

f. बादाम, जायफल और लौंग: बादाम, जायफल, और लौंग में पाया जाने वाला विटामिन ई कामेच्छा को बढ़ाने में मदद कर सकता है और मानसिक स्थिति को सुधार सकता है।

g. ब्राजील नट्स: ब्राजील नट्स अमाउंट्स में बहुत ज्यादा सिलेनियम होता है, जो शुक्राणुओं के गतिविधि को बढ़ाता है और कामेच्छा को बढ़ावा देता है।

f.डार्क चॉकलेट: डार्क चॉकलेट में फेनिलएथिलामीन होता है, जो शारीर में ज्यादा से ज्यादा एन्डोर्फिन उत्पन्न करने में मदद कर सकता है और कामेच्छा को बढ़ावा देता है।

g. केसर: केसर आमतौर पर पुरुषों और महिलाओं दोनों में सेक्स ड्राइव और सेक्सुअल फंक्शन को बढ़ा सकता है। 2012 की एक पुरानी अध्ययन ने महिलाओं के प्रभाव को देखा जिन्होंने antidepressant fluoxetine के सेवन के कारण सेक्सुअल डिसफंक्शन का अनुभव किया था। 4 हफ्ते के लिए प्रतिदिन 30 मिलीग्राम की केसर लेने वाली महिलाएं कामोत्तेजना और vaginal lubrication बढ़ने का अनुभव करती थीं।

2. व्यायाम:

  • नियमित व्यायाम: रक्त प्रवाह को बढ़ाता है और तनाव को कम करता है, जिससे कामोत्तेजना बढ़ सकती है।
  • योग: योगासन योनि मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं और कामुकता को बढ़ा सकते हैं। बढ़ाने वाले योगासन
  • मार्जरी आसन

  • सेतुबंध सर्वांगासन

  • आनंद बालासन

3. तनाव कम करना:

  • तनाव कामोत्तेजना का दुश्मन है: ध्यान, योग, या गहरी सांस लेने के व्यायाम तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।
  • पर्याप्त नींद: नींद की कमी से थकान और चिड़चिड़ापन हो सकता है, जो कामोत्तेजना को कम कर सकता है।

4. कामुक उत्तेजना:

  • पढ़ना, देखना, या सुनना: कामुक सामग्री आपको उत्तेजित कर सकती है और आपकी कामोत्तेजना को बढ़ा सकती है।
  • अपने साथी के साथ संवाद: अपनी इच्छाओं और जरूरतों के बारे में खुलकर बात करें।
  • नई चीजें आज़माएं: विभिन्न प्रकार की उत्तेजनाओं का अन्वेषण करें और देखें कि आपके लिए क्या काम करता है।

5. प्राकृतिक पूरक:

  • कुछ प्राकृतिक पूरक: जैसे कि अश्वगंधा, गिंगको बिलोबा, और मैका कामोत्तेजना को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
  • पूरक लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें: क्योंकि वे अन्य दवाओं के साथ परस्पर क्रिया कर सकते हैं।

6. योनि स्वास्थ्य:

  • योनि को स्वस्थ रखें: नियमित रूप से योनि को हल्के साबुन से धोएं और सूखे कपड़े से पोंछें।
  • योनि संक्रमणों से बचें: यदि आपको योनि में खुजली, जलन, या असामान्य स्राव है, तो डॉक्टर से मिलें।

7. योनि स्नेहक:

  • योनि स्नेहक: यौन क्रिया को अधिक आरामदायक और सुखद बना सकता है, जिससे कामोत्तेजना बढ़ सकती है।

8. जड़ी-बूटियाँ और मसाले:

  • कुछ जड़ी-बूटियाँ और मसाले: जैसे कि अश्वगंधा, शतावरी, और दालचीनी कामोत्तेजना को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

9. कामुक माहौल:

  • एक कामुक माहौल बनाएं: मोमबत्तियां जलाएं, सुगंधित तेलों का उपयोग करें, और आरामदायक संगीत बजाएं।

10. वैकल्पिक चिकित्सा:

  • कुछ वैकल्पिक चिकित्सा: जैसे कि एक्यूपंक्चर और अरोमाथेरेपी कामोत्तेजना को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

 

अतिरिक्त जानकारी:

  • https://www.webmd.com/
  • https://www.mayoclinic.org/
  • https://www.nimh.nih.gov/
  • https://www.bensnaturalhealth.com/blog/sexual-health/sweet-potato-benefits-sexually/#f-h2-0
  • https://onlinelibrary.wiley.com/doi/full/10.1002/hup.2282
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