इम्यूनिटी कैसे बढ़ाएं ? इम्यूनिटी बढ़ाने के 7 घरेलू उपाय

(Immunity bdhane ke 7 gharelu upay in Hindi)

Synopsis: इम्यूनिटी कैसे बढ़ाएं ? इम्यूनिटी बढ़ाने के 7 घरेलू उपाय, इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए क्या क्या खाना चाहिए

गर्मी से राहत पाने के लिए लोग बेसबरी से बारिश के मौसम का वेट करते है और जैसे ही जोरदार बारिश की शुरुआत हो जाती है तो बारिश का यह मौसम जहाँ चारों तरफ जहाँ हरियाली लाता है तो वहीं कुछ छोटी-छोटी बिमारिया भी साथ लेके आता है जिसमे सर्दी, ख़ासी , बुखार , चिकनगुनिया , डेंगू , मलेरियाँ, हेपेटाइटिस प्रमुख है।

ऐसे में ज़रूरी है खुद को मच्छरों ,गंदे पानी और हानिकारक दूषित भोजन के सेवन से खुद को बचाना साथ ही अपने शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाना

चलिए जानते है शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कौन से घरेलू उपचार किये जा सकते है।

इम्यूनिटी कैसे बढ़ाएं ?

(Immunity kaise bdhaye in Hindi)

 

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आप इन 7 घरेलू उपायों का अनुसरण कर सकते हैं:(Immunity bdhane ke asardaar gharelu upaay)

1.

हल्दी वाला दूध पीयें

हल्दी का दूध चाहे बड़े हो, बूढ़े हो या फिर बच्चे हर उम्र के लोगों के लिए रामबाण की तरह कार्य करता है, एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर हल्दी का दूध बढ़ा ही फायदेमंद होता है जिससे शरीर की प्रतिरक्षा होती है। इसलिए नियमित तौर पर रात को सोने से पहले एक गिलास

गर्म दूध में एक चुटकी हल्दी मिलाकर पिएं आप चाहे तो आधे चम्मच से कम हल्दी लेकर दूध में डालकर उबाल लें , फिर इसका सेवन करें।

लाभ

  1. हल्दी के दूध के नियमित सेवन से इम्युनिटी शक्ति बढ़ती है.
  2. यह सर्दी ,खासी और जुकाम से तुरंत राहत दिलाने का काम करता है।
  3. इससे डाइजेस्टिव सिस्टम भी सुधरता है।
  4. हड्डियाँ ताकतवर और मजबूत बनती है।
  5. यह त्वचा की रंगत सुधारने में भी सहायक होता है।

2.

नींबू और शहद के पानी का सेवन

सुबह-सुबह खाली पेट नींबू और शहद को हल्के कुनकुने पानी में मिलाकर पीयें इससे इम्म्यून सिस्टम बढ़ता है क्यों कि नींबू में विटामिन C होता है जो इम्यूनिटी को बढ़ाता है। एक गिलास गुनगुने पानी में आधे नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर पिएं।

लाभ

  1. यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है।
  2. यह मिश्रण शरीर से गंदे -विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है, लिवर को साफ करता है।
  3. इसे पीने से शरीर में ऊर्जा की वृद्धि होती है।
  4. नींबू और शहद का पानी गले की खराश और सर्दी में राहत प्रदान करता है।
  5. नींबू और शहद का पानी त्वचा को साफ और चमकदार बनाता है।

3.

अदरक और शहद का सेवन कर इम्युनिटी बढ़ाए

खांसी और गले में खराश से राहत दिलाने में अदरक और शहद बेहद ही लाभकारी होता है जो आजकल दवाई के रूप में भी प्रयोग किया जाने लगा है जैसे डाबर का हनीटस जो बच्चो से लेकर बढ़ो तक सब फायदेमंद होता है।

खअदरक में एंटीऑक्सिडेंट्स और शहद में पाए जाने वाले एंटीबैक्टीरियल गुण बड़े ही फायदेमंद होते हैं। अदरक के रस में शहद मिलाकर दिन में दो बार सेवन करें। इससे इम्युनिटी बढ़ती है , शहद में विटामिन बी1 ,बी 2, एवं विटामिन बी 3 उपस्थित होता है जो इम्युनिटी को बूस्ट (Immunity boost) करता है।

लाभ

  1. अदरक का रस और शहद का मिश्रण पाचन तंत्र को सुधारता है।
  2. अदरक और शहद का मिश्रण शरीर को ताजगी से भरपूर रखता है और ऊर्जा प्रदान करता है। इसे सुबह के समय लेने से दिनभर ऊर्जा महसूस होती है।
  3. शहद और अदरक का मिश्रण गले की खराश और सूजन को कम करता है और तुरंत राहत प्रदान करता है।
  4. यह अपच, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।
  5. अदरक और शहद का मिश्रण मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में भी सहायक होता है।

4.

इम्युनिटी बढ़ाने के लिए लहसुन खाएं

रोगों से बचाने के लिए आप लहसुन को सुबह-सुबह खाली पेट खाएं यह पेट के साथ शरीर में नई ऊर्जा संचालित करता है। आप चाहे तो 4 से 5 लहसुन की कलियों को देसी घी में सेंक कर फिर खाये ताकि इसकी तामसिकता कम हो जाएं।

लाभ

  1. यह डाइजेस्टिव सिस्टम को सुधारता है।
  2. यह बुरे कोलेस्ट्रॉल हो बाहर निकालता है.
  3. यह इम्युनिटी को बढ़ाने का काम करता है।
  4. इतना ही नहीं यह किडनी की समस्या ,स्किन प्रॉब्लम में मस्से की समस्या को सॉल्व करने भी कारगर है।
  5. इसमें मौजूद इन्फ्लामेट्री और एन्टीबैक्टेरि प्रॉपर्टी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का भी कार्य करता है।

5.

इम्युनिटी बढ़ाने के लिए गिलोय का सेवन करें

गिलोय एक प्राकृतिक इम्यूनिटी बूस्टर है। अगर आप नियमित तौर पर इसका सेवन करते है तो गिलोय आपकी इम्युनिटी पॉवर को बढ़ाएगा और बिमारी से बचाएगा। आप चाहे तो ओरिजनल गिलोय की डंडी लेकर उसके छीलकर रातभर के लिए एक कांच के गिलास में भरकर रख दें फिर इसे सुबह सुबह खाली पेट पीयें। आप चाहें तो गिलोय का सिरप, काढ़ा या गिलोय की गोलियां भी लें सकते है इससे भी इम्यूनिटी बढ़ती है।

एक प्राचीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी गिलोय है जिसे “अमृता” भी कहा जाता है।

लाभ

  1. गिलोय का काढ़ा या जूस पीने से सर्दी, खांसी और बुखार में राहत मिलती है।
  2. गिलोय पेट की समस्याओं से राहत दिलाता है गैस, अपच और कब्ज़ से आराम दिलाता है।
  3. गिलोय में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करते हैं। यह आर्थराइटिस के मरीजों के लिए भी लाभकारी होता है।
  4. गिलोय न केवल श्वसन तंत्र की समस्याओं जैसे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस में राहत दिलाता है बल्कि श्वसन नलियों को साफ करता है और सांस संबंधित समस्याओं को कम करता है।
  5. गिलोय एनीमिया के मरीजों के लिए लाभप्रद होता है। यह रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है।
  6. गिलोय में इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं और शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।

6.

इम्युनिटी बूस्ट करें तुलसी के पत्ते

हर घर में तुलसी का पौधा उपलब्ध होता ही है अगर आप इसे एक औषधिय रूप में लेते है तो तुलसी के पत्ते में मौजूद एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल गुण हर तरह से फायदेमंद होते है। रोज़ सुबह तुलसी के 4-5 पत्ते चबाना या तुलसी की चाय पीना सेहत के लिए है लाभप्रद।

तुलसी को आयुर्वेद में “महारानी” का दर्जा दिया गया है।

लाभ

  1. इम्युनिटी को बढ़ाने में तुलसीके पत्ते है बेहद ही फायदेमंद क्योंकि तुलसी में एंटीऑक्सिडेंट्स और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते है और शरीर को संक्रमण से बचाते हैं।
  2. गले की खराश, खांसी और सर्दी में राहत दिलाने में तुलसी के पत्तों का काढ़ा फायदेमंद होता है।
  3. तुलसी के पत्तों का नियमित सेवन कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) से दिल की हिफ़ाजत करता है।
  4. तुलसी के पत्तों में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो शरीर को विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से बचाते हैं।
  5. तुलसी के पत्तों का सेवन श्वसन तंत्र की समस्याओं जैसे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस में राहत दिलाता है।

7.

इम्युनिटी को बढ़ाये योग और प्राणायाम के जरिए

यह तो हम सभी जानते है कि शरीर को सुचारु रूप से चलाने के लिए फिजिकल फिटनेस बहुत ज्यादा ही ज़रूरी है अगर आप नियमित रूप से योग और प्राणायाम करते है तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। इतना ही नहीं बल्कि श्वसन भस्त्रिका ,अनुलोम-विलोम और कपालभाति प्राणायाम के जरिये बहुत से स्वास्थ्य लाभ मिलते है।

लाभ

  1. इम्म्युनि शक्ति बढ़ाने के लिए नियमित तौर पर योग व प्राणायाम करें इससे मानसिक शक्ति मिलती है।
  2. योग और प्राणायाम के जरिये शरीर में रक्त संचार सुधरता है, जिससे कोशिकाओं को अधिक ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलते हैं। इससे इम्युनिटी मजबूत होती है।
  3. मेटाबॉलिज्म सही होने से शरीर की ऊर्जा स्तर और इम्युनिटी में सुधार होता है।
  4. पाचन शक्ति(मेटाबॉलिज्म) बढ़ाने और सही करने में सहायक होता है।
  5. योग और प्राणायाम से नींदअच्छी आती है क्यों कि शरीर अपने आप थकता है जिससे अच्छी नींद आती है।
  6. योग एवं प्राणायाम के जरिये बॉडी बहारी और आंतरिक रूप से सुन्दर और आकर्षक बनती है और आप सालो तक जवा दिखते है।

इन सभी आसान घरेलू उपायों को अपनाकर आप रोगो से अपने शरीर का बचाव कर सकते है और इम्युनिटी को बढ़ा सकते है यह सभी उपाय कारगर और अपनयाये गए है।

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए क्या क्या खाना चाहिए

(immunity boosting food in Hindi)

 

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए क्या क्या खाना चाहिए? Immunity boosting food के लिए आप अंकुरित मोठ ,चना ,मुंग ,मेथीदाना का सेवन कर सकते है और नियमित तौर पर बादाम ,अंजीर , किशमिश और अखरोट को daily पानी में भिगोकर सुबह-सुबह खाली पेट लें, इससे आंतरिक रूप से आपको ऊर्जा मिलेगी और पूरे दिन आप एनर्जेटिक महसूस करेंगे।

मौसमी फल और सब्जियों जैसे: संतरा, अमरूद, गाजर, पालक, मूली, साग आदि ज्यादा खाएं। विटामिन-सी की कमी नहीं हो इसलिए नींबू का रस एक गिलास पानी में या एक संतरे का रस या एक आंवला या एक प्लेट अन्नानास रोज लेना चाहिए।

बच्चों की हाइट बढ़ाने के लिए करवाए यह 6 योगासन

(Yogasana for Increasing Height of Kids)

Synopsis: बच्चों की हाइट कैसे बढ़ाए ? हाइट बढ़ाने के योगासन (Yogasana for Increasing Height of Kids)

आजकल की बदलती लाइफ स्टाइल ने जहाँ माँ-बाप को भागता-दौड़ता बना दिया है तो वही बच्चों पर ध्यान न दें पाना भी एक परेशानी की वजह बनता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसमें कई पेरेंट्स अपने बच्चों की हाइट को लेकर अक्सर परेशान होते हुए दिखाई पड़ते है।

आज के समय में जहां देखो वहा बच्चे फिजिकल एक्टिविटी करते हुए कम ही दिखाई देते है। बच्चे आउटडोर गेम्स खेलना जैसे भूल से गए है क्यों कि उनकी जगह “मोबाइल्स” ने जो लें रखी है यही मेन कारण है कि बच्चें घंटो-घंटो मोबाइल में लगे रहते है ,गेम्स या रील्स देखते हुए अपना टाइम पास करते रहते है और दिनचर्या बस स्कूल से घर और घर से स्कूल बनकर ही रह जाती है। अगर आप भी अपने बच्चों की हाइट को लेकर अक्सर परेशान रहते है तो मेरे सवाल का यह आर्टिकल आपके लिए ही है।

बच्चों की हाइट कैसे बढ़ाए ?

(baccho ki hight kaise badhaye in hindi)

तो चलिए आपकी चिंता दूर करते है और बताते है ऐसे ही कुछ प्रमुख योगासनों के विषय में –

बच्चों की हाइट बढ़ाने के लिए आप बिना सप्लीमेंट्स दिए सिर्फ योग के जरिये अपने बढ़ती उम्र के बच्चों की हाइट बढ़ा सकते है।

हाइट बढ़ाने के योगासन

( Yogasana to increase hight in hindi)

 

1.

ताड़ासन

(Tadasana)

ताड़ासन जिसे माउंटेन पोज भी कहते है यह बच्चों की हाइट बढ़ाने के लिए एक अत्यंत प्रभावी योगासन है। इसमें बच्चे को पहले सावधान की स्थिति में सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को ऊपर की ओर खींचना होता है। इस आसन को करने से शरीर के मसल्स में खिंचाव होता है, जिससे हाइट बढ़ने में मदद मिलती है।

2.

सूर्य नमस्कार

(Surya Namaskar)

सूर्य नमस्कार 12 योगासन का सम्मिलन होता है जो शरीर के विभिन्न हिस्सों के लिए या यू कहे ही ओवरआल बॉडी कों स्ट्रेचिंग और मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाता है। आप नियमित रूप से सूर्य नमस्कार करने की आदत बच्चों में डाल सकते है जिससे वह पूरे दिन एनर्जेटिक महसूस करेंगे और हाइट बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

3.

वृक्षासन

(Vrikshasana)

वृक्षासन या ट्री पोज में बच्चे को एक पैर पर खड़े होकर बेलेन्स बनाना होता है तो वही दूसरे पैर को घुटने तक उठाकर सीधे खड़े पैर पर एड़ी से पंजे की तरफ रखना होता है। कम से कम 5 से 8 मिनट तक बैलेंस बनाने का ट्राय करवाए। यह संतुलन और कंसंट्रेशन को बढ़ाने के साथ-साथ हाइट बढ़ाने में भी मदद करता है।

4.

भुजंगासन

(Bhujangasana)

भुजंगासन या कोबरा पोज बच्चों के डाइजेस्टिव सिस्टम को मजबूत बनाता है तो वही रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने और हाइट बढ़ाने में सहायक होता है।

इस आसान को करने के लिए बच्चे को पेट के बल लेटकर अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को सांस लेते हए ऊपर उठाना होता है एवं सांस छोड़ते हुए नीचे लाना होता है।

इस प्रक्रिया को कम से कम 10 बार करवाए।

5.

उत्तानासन

(Uttanasana)

उत्तानासन में बच्चों को खड़े होकर आगे की ओर झुकना होता है और अपने हाथों से पैरों के अंगूठे को टच करने का प्रयास करना होता है जिससे शरीर के पीछे के हिस्से में खिंचाव आता है। यह आसन बच्चों की हाइट बढ़ाने में सहायक होता है।

6.

पश्चिमोत्तानासन

(Pashchimottanasana)

इस आसन में बच्चे को सीधे बैठकर अपने पैरों को सीधा फैलाकर हाथों की उंगलियों से पैरों के पंजे पकड़ते हुए आगे की ओर सिर गुठनों तक झुकाना होता है। इससे शरीर के पीछे के हिस्से में खिंचाव आता है और हाइट बढ़ने में मदद मिलती है।

नोट – जितना हो सके सुबह के समय शौच आदि से निर्वत होने के बाद ही आप यह सभी योगासन नियमित रूप से अपने बच्चों को करवाए।

7

अर्ध चक्रासन या हाफ व्हील पोज

अर्धचक्रासन, एक महत्वपूर्ण योग आसन है।

  • इस आसन को करने के लिए पहले दोनों पैरों पर सीधे खड़े होकर, दोनों हाथों को कुल्हें पर रखते हुए शरीर का आधा हिस्सा पीछे की और झुखाने का प्रयास करें और श्वास लें।
  • जितना संभव हो, कमर को पीछे की ओर झुकाते हुए हाथों को उठाकर पीछे की ओर ले जाएं।
  • इस अवस्था में कुछ सेकंड तक रुकें और सामान्य रूप से श्वास लें।
  • अब धीरे-धीरे वापिस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

लाभ

अर्धचक्रासन शरीर में लचीलापन और एनर्जी को बढ़ाने में मदद करता है। अर्धचक्रासन को “हाफ व्हील” पोज़ भी कहा जाता है अर्धचक्रासन करने के कई फायदे होते हैं, जैसे कि

  • रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाना,
  • पेट की मांसपेशियों को टोन करना,
  • शारीरिक व मानसिक तनाव को कम करना।
  • और सबसे महत्वपूर्ण हाइट बढ़ाना।

आप नियमित तौर पर इस आसन को करवा कर अपने बच्चों की हाइट बढ़वा सकते है।

8.

धनुर्रासन (बो पोज़)

धनुर्रासन में शरीर का पोज़ धनुष के आकर का दिखाई देता है

इसे करने के लिए पेट के बल सीधे लेट जाये।

  • फिर गुठनों को मोड़ते हुए पैरों के अंगूठो को दोनों हाथो की सहायता से पकड़ लें। आगे की तरफ से सर और चेस्ट का ऊपरी हिस्सा ऊपर उठाते हुए सांस भरते हुए ऊपर की और हाफ बॉडी को यू के आकर में बेंड करें। जो धनुष की तरह दिखाई देगा।
  • कुछ सेकड़ के लिए होल्ड करके रखें।
  • फिर सांस छोड़ते हुए पुनः पहली वाली स्थिति में आ जाये। शरीर को रिलैक्स करने दें।
  • इस प्रक्रिया को कम से कम 5 से 8 बार धोराये।

लाभ

  • धनुर्रासन शरीर को फेक्सिबल बनता है।
  • धनुर्रासन पेट पर जमी एक्स्ट्रा फैट को कम करने में हेल्पफुल होता है।
  • धनुर्रासन हाइट बढ़ाने में सहायक होता है।
  • जांघों, छाती, और कंधों की मांसपेशियों को टोन करता है।

9.

वीर भद्रासन

इस आसन का नाम वीरभद्र नामक एक महान योद्धा के नाम पर रखा गया है, जो कि भगवान शिव के एक अवतार थे। वीरभद्रासन से शरीर में संतुलन, शक्ति और स्थिरता बढ़ती है। वीरभद्रासन, जिसे वॉरियर पोज़ (Warrior Pose) भी कहा जाता है

  • अपने दाएँ पैर को 90 डिग्री पर मोड़ें और बाएँ पैर को हल्का अंदर की ओर घुमाएँ।
  • अपनी दोनों भुजाओं को कंधों के बराबर में, ज़मीन के समानांतर, सीधा फैलाएं।
  • श्वास लें और अपने दाएँ घुटने को मोड़ें, इस बात का ध्यान रखें कि घुटना टखने के सीध में हो।
  • अपने सिर को दाईं ओर घुमाएँ और सामने की ओर देखें।
  • इस स्थिति में 15 से 30 सेकंड तक रहें, और सामान्य रूप से श्वास लेते रहें।
  • श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में लौटें।
  • अब दूसरी दिशा में भी यही प्रक्रिया दोहराएँ।

लाभ

  • एक शक्तिशाली योगासन है जो योद्धा की तरह ताकत, स्थिरता, और साहस का प्रतीक है।
  • वीर भद्रासन हाइट बढ़ाने में सहायक होता है।

10.

सर्वांगासन

(Shoulder Stand)

सर्वांगासन एक प्रभावशाली योगासन है, जो शरीर के लगभग सभी अंगों पर काम करता है, इसलिए इसे सर्वांगासन कहा जाता है। यह आसन विशेष रूप से रीढ़, गर्दन, और कंधों के लिए फायदेमंद है, और यह शरीर की मुद्रा सुधारने और लंबाई बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

  • सबसे पहले पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं, अपने पैरों को साथ रखें और हाथों को शरीर के पास रखें, हथेलियाँ नीचे की ओर हों।
  • श्वास लेते हुए धीरे-धीरे अपने पैरों को एक साथ ऊपर की ओर उठाएं, ताकि वे 90 डिग्री के कोण पर आ जाएं।
  • अब हाथों की सहायता से अपनी कमर को उठाएं। अपनी कोहनियों को ज़मीन पर टिकाएं और दोनों हाथों से कमर को सहारा दें।
  • अपने पैरों और शरीर को एक सीधी रेखा में लाएं, ताकि आपके पैर, कूल्हे और पीठ एक सीध में हों। आपकी ठुड्डी छाती से टच होनी चाहिए।
  • ध्यान दें कि आपका पूरा भार कंधों और हाथों पर हो, गर्दन पर कोई दबाव न डालें।
  • इस आसन में 30 सेकंड से लेकर 2 मिनट तक रहें, और सामान्य रूप से श्वास लें। अपनी क्षमता के अनुसार समय को धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं।
  • आसन से बाहर आने के लिए –
  • धीरे-धीरे पैरों को नीचे की ओर लाएं और अपनी कमर को धीरे-धीरे ज़मीन पर वापस लाएं।
  • फिर पैरों को वापस ज़मीन पर ले जाएं और प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।

इन सभी योगासनों के अलावा आप बच्चों को पिज़्ज़ा और बर्गर से दूर रहने की हिदायत दें और जहां तक हो मल्टीग्रैन आटे का प्रयोग करें, सलाद खाने के लिए प्रेरित करें। यह बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाता है और हाइट बढ़ाने में सहायक है।

Weight loss के लिए डिटॉक्स वॉटर घर में कैसे तैयार करें ?

Synopsis: घर में Weight loss के लिए डिटॉक्स वॉटर कैसे तैयार करें ? (Detox Water for Weight Loss in Hindi) स्किन को मिले बेहतरीन फायदे

Detox Water for weight loss in Hindi)

आप सभी पाठको का मेरे सवाल के इस आर्टिकल में हार्दिक स्वागत है। आज का आर्टिकल आधारित है स्किन याने त्वचा को आंतरिक रूप से साफ़ कैसे रखा जाए ? वह भी बिना किसी दवाइयों का सहारा लिए बगैर। वैसे तो मार्केट में ऐसे कई सारे ब्यूटी प्रोडक्ट्स मौजूद है जो त्वचा को साफ़ करने ,रंगत सुधारने, गोरा दिखने, पिम्पल्स फ्री त्वचा पाने का दावा करते है और कुछ हद तक यह आपको सटिस्फाईड़ (Satisfied) भी करते है। पर जब बात आंतरिक तौर पर त्वचा /स्किन को साफ करने की आती है तो यह सभी प्रोडक्ट्स लंबे समय तक रिजल्ट देने में फेल हो जाते है।

तब हमें ख्याल आता है कुछ ऐसे ड्रिंक्स का या आहार का जिनके सेवन मात्र से कुछ दिनों में हमारी त्वचा साफ़ हो जाये ,चमकने लगे, पिम्पल फ्री और ऑयली फ्री (drink for glowing skin) हो जाए और साथ ही डाइजेशन जैसी समस्या के साथ थोड़ा बहुत वेट (weight loss detox water) भी कम हो जाये। अगर आप भी इन सभी प्रकार की समस्याओं से झूझ रहे है तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है। अंत तक जरूर पढ़े इसमें आप जानेंगे घर बैठे डेटॉक्स वाटर ड्रिंक कैसे तैयार किया जा सकता है और मार्केट में मिलने वाले डेटॉक्स वाटर ड्रिंक से कैसे बचा जा सकता है।

अगर आप अब तक (highly preservatives) हाईली युक्त डिटॉक्स ड्रिंक पी रहे है तो अब रुक जाइये क्यों कि यह डिटॉक्स ड्रिंक्स आपके शरीर से विषैले टॉक्सिंस को पूरी तरह बाहर निकालने में असमर्थ होता है जिसका असर वेट लॉस पर भी पड़ता है।

तो चलिए जानते है…. घर पर ही इन डिटॉक्स ड्रिंक्स (detox water drink) को आप कैसे तैयार कर सकते है। जो आपकी स्किन के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं …?

डिटॉक्स वॉटर और उसके फायदे

(Detox water and benefits)

 

त्वचा की चमक के लिए ड्रिंक

(Drink for glowing skin in Hindi) ?

 

1.

नींबू, पुदीना और हरी धनियां डेटॉक्स वॉटर

सामग्री:

1. 1 नींबू

2. कुछ पुदीना की पत्तियाँ

3. थोड़ा सा हरा धनियां

4. 1 लीटर पानी

विधि:

1. सबसे पहले मिंट और हरा धनियाँ को अच्छे से धोकर मिक्सी में डालकर पीस लें। फिर एक जग में एक लीटर पानी में एक नींबू को पतले स्लाइस में काटकर डालें।

2. इस मिश्रण को 1से 2 घंटे के लिए रखें ताकि नींबू और पुदीना का स्वाद पानी में अच्छी तरह मिल जाए।

3. थोड़ी देर के लिए फ्रीज में रख दें।

4. फिर ठंडा-ठंडा पिएं।

2.

खीरा और अदरक का डिटॉक्स वॉटर

सामग्री:

1. 1 खीरा

2. 1 इंच अदरक का टुकड़ा

3. 1 लीटर पानी

विधि:

1. एक खीरे को धोकर को पतले स्लाइस में काटें।

2. अदरक के टुकड़े को कद्दूकस कर इसका रस निकल लें।

3. एक लीटर पानी में खीरा और अदरक डालें।

4. इस मिश्रण को 1-2 घंटे के लिए रखें।

5. कुछ देर के लिए फ्रीज़ रखें ताकि यह ठंडा हो जाए।

6. फिर इसे गिलास में लेकर ठंडा-ठंडा पिएं।

फायदे: (Detox water peen ke fayde)

1. खीरा त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है और अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीएजिंग गुण होते हैं जो त्वचा की सूजन को कम करते हैं।

3. ब्लड को साफ़ करने का काम और भोजन को पचाने का काम करते है।

3.

सेब और दालचीनी से बनाये डिटॉक्स वॉटर

सामग्री:

1. 1 सेब

2. 1 दालचीनी स्टिक

3. 1 लीटर पानी

विधि:

1. एक सेब को पतले स्लाइस में काटें।

2. एक दालचीनी स्टिक लें।

3. एक लीटर पानी में सेब और दालचीनी स्टिक डालें।

4. इस मिश्रण को 1-2 घंटे के लिए फ्रिज में रखें।

5. ठंडा-ठंडा पिएं।

फायदे: (benefits of detox water)

1. सेब में एंटीऑक्सीडेंटऔर विटामिन A होता हैं जो स्किन को जवान बनाए रखते हैं।

2. दालचीनी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो स्किन को साफ और स्वस्थ रखते हैं।

4.

नारियल पानी और एलोवेरा डिटॉक्स ड्रिंक

सामग्री:

1. 1 कप नारियल पानी

2. 2 चम्मच एलोवेरा जेल

विधि:

1. नारियल पानी में एलोवेरा जेल मिलाएँ।

2. इस मिश्रण को अच्छे से मिलाएँ।

3. ताजगी देने के लिए तुरंत पिएं।

फायदे:

1. नारियल पानी स्किन को हाइड्रेट करता है।

2. एलोवेरा स्किन को नरिश करता है और स्किन की इलास्टिसिटी बढ़ाता है। पिम्पल फ्री रखता है।

5 .

अनार और पुदीना से बना डिटॉक्स वॉटर

सामग्री:

1. 1 कप अनार के दाने

2. कुछ पुदीना की पत्तियाँ

3. 1 लीटर पानी

विधि:

1. एक लीटर पानी में अनार के दाने और पुदीना की पत्तियाँ डालें।

2. अगर आप चाहे तो अनार के दानों को मिक्सी में पीस भी सकते है।

3. इस मिश्रण को 1-2 घंटे के लिए फ्रिज में रखें।

4. ठंडा-ठंडा पिएं।

फायदे:

1. अनार: अनार में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन C होते हैं जो त्वचा को नमी और चमक प्रदान करते हैं। यह त्वचा को हाइड्रेटेड और स्वस्थ बनाए रखता है।

2. पुदीना: पुदीना में मौजूद मेंथॉल आपकी त्वचा को ताजगी और ठंडक प्रदान करता है। यह त्वचा के जलन और सूजन को भी कम करता है।

अतिरिक्त सुझाव:

1. इसके स्वाद को बेहतर बनाने में आप इस डेटॉक्स ड्रिंक में थोड़ी सी नींबू का रस भी मिला सकते हैं।

2. अगर आप इस डेटॉक्स ड्रिंक को और अधिक स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं तो इसमें कुछ स्ट्रॉबेरी या ब्लूबेरी के टुकड़े भी मिला सकते हैं।

3. इन ड्रिंक्स को सुबह खाली पेट पीने से त्वचा को प्राकृतिक निखार मिलता है एवं पाचन तंत्र मजबूत बनता है और पेट भी साफ रहता है।

इन डेटॉक्स ड्रिंक्स को अपने दैनिक जीवन में शामिल करके, आप न केवल अपनी त्वचा को निखार सकते हैं बल्कि अपने शरीर को भी विषैले तत्वों से मुक्त रख सकते हैं।

नियमित रूप से इनका सेवन करने से आपको लंबे समय तक स्वस्थ और चमकदार त्वचा मिल सकती है।

इन 5 तरीकों से आप होम मेड डेटॉक्स वाटर ड्रिंक (Home made water detox drinks) तैयार कर सकते है और आंतरिक तौर पर खुद को सुन्दर और जवान बना सहते है।

यूरिनरी ट्रेक्ट इन्फेक्शन मूत्राशय संक्रमण (UTI ) का पता कैसे लगता है? इसे निजात पाने के आसान 15 घरेलू उपाय

Synopsis: यूरिनरी ट्रेक्ट इन्फेक्शन मूत्राशय संक्रमण (UTI ) का पता कैसे लगता है? इसे निजात पाने के आसान 15 घरेलू उपाय

यह तो हम सभी जानते है की शरीर को सुचारु रूप से काम करने के लिए उत्सर्जन की प्रक्रिया कितनी महत्वपूर्ण होती है जिसमें शौच सबसे महत्वपूर्ण क्रिया है अगर आपका पेट साफ़ रहता है तो पूरा दिन अच्छा गुजरता है लेकिन वही अगर आप यूरिन की समस्या से ग्रस्त हो जाते है (UTI Infection )तो यह आपके लिए एक दुखद अनुभव हो जाता है जिसमें कुछ प्रमुख लक्षण है जिनको आप ध्यान में रखकर पता लगा सकते है की कही आप इसके शिकार तो नहीं हो गए हैं।

ध्यान रखें यह समस्या किसी भी स्त्री या पुरुष को हो सकती है।

जैसे कि –

मूत्राशय संक्रमण (UTI) के लक्षण में निम्नलिखित बाते शामिल हो सकती है।

यूरिनरी ट्रेक्ट की समस्या

Urinary tract issues in Hindi)

(Symptoms of UTI in hindi )

  1. मूत्र (यूरिन) पास करते समय दर्द या जलन का अनुभव होना।
  2. बार-बार बाथरूम जाने का अहसास होना।
  3. अत्यधिक मात्रा में यूरिन का उत्पादन होना।
  4. कभी ज़्यादा मूत्र आना और कभी कम मूत्र आना ।
  5. मूत्र में अजीब सी बदबू का महसूस होना
  6. यूरिन पास करते टाइम खून का पेशाब के साथ दिखाई देना।
  7. पीले रंग की पेशाब का आना।
  8. बार-बार होठों का सूखना।
  9. पेशाब करते समय पेट के निचले हिस्से में ऐंठन और खिचाव का होना।
  10. शरीर में थकान और वीकनेस सा लगना।
  11. प्रेगनेंसी के समय यूरिन इन्फेक्शन से ग्रसित हो जाना।
  12. घंटो समय तक पेशाब को रोके रखना।
  13. महिलाओं में पीरियड्स ख़त्म होने के दौरान UTI इन्फेक्शन।
  14. डायबटीज़ या शुगर की समस्या हो जाने के दौरान।
  15. सेक्स के दौरान भी कई पुरुषों या महिलाओं में Urine Infection की समस्या हो सकती है।

अगर आपको इन सभी लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखाई पड़ते है तो तुरंत अपने डॉक्टर्स या गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करें। जिससे आपको कन्फर्म हो जाये की कही आप UTI से ग्रसित तो नहीं है। अगर हो भी गए है तो वह आपको इसके उपचार के लिए कई विशेष सलाह देंगे।

UTI इन्फेक्शन दूर करने के 15 घरेलू उपाय

अगर आप यूटीआई इंफेक्शन से ग्रसित हो गए है और घर पर रहकर ही इसका इलाज ढूंढ रहे है तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है।

यूटीआई इंफेक्शन को दूर करने के लिए हम यहां 15 ऐसे दादी माँ के

घरेलू उपाय आपसे शेयर कर रहे हैं, जो आजमाए एवं वापरे गए है। क्यों कि UTI इन्फेक्शन का जितना जल्दी इलाज हो सके कर लेना चाहिए जरा सी लापरवाही किडनी (Kidney) पर भी असर डाल सकती है।

 

  1. पानी से दूर करे UTI इन्फेक्शन की समस्या -Urinary tract infection dur kare pani se in Hindi
  2. यूरिनरी ट्रेक्ट से बचने के लिए करें क्रेनबेरी का उपयोग -Urine infection ki problem solve kare Cranberry se in Hindi
  3. प्राकृतिक पालक से हटाए (UTI infection ) – Netural palak samadhan hai urine infection ki samsya ka in Hindi
  4. अदरक से दूर करें यूरिनरी ट्रेक्ट की समस्या- UTI ki problem solve karne ke liye kare Ginger /Adrak ka upyog in Hindi
  5. यूरिन इन्फेक्शन का घरेलू उपाय है आंवला- Urine infection se bachane ka ghrelu upay hai Amla in Hindi
  6. यूरिन इन्फेक्शन से बचने का तरीका सेब का सिरका -Utinary infection me seb ke sirke ka prayog hai Ramband in Hindi
  7. यूटीआई का घरेलू उपाय है बेकिंग सोडा – Baking sode ke ghrelu prayog se dur kare UTI ki samasya in Hindi
  8. यूरिन इन्फेक्शन से बचने तरीका है गर्म सेक – Gram sek dilaye UTI ke dard me aaram in Hindi
  9. मूत्र मार्ग संक्रमण को रोके टी तट्री तेल – Mutra marg sankramn (uti infection) ko felne se roke tea tree tel (oil) in Hindi
  10. पेशाब नली में इन्फेक्शन रोकने का उपाय है अनानास- Peshabnali me hone wale infection ko rokne ka upay hai Ananas/Pineapple in Hindi
  11. यूरिन इन्फेक्शन ठीक करे ब्लूबेरी से -Blueberry ke upyog se thik kare Urinary tract ki samasya in Hindi
  12. यूरिन ट्रैक्ट इन्फेक्शन में करे नारियल पानी का प्रयोग -UTI ki problem solve karne ke liye piye nariyal pani in Hindi
  13. यूरिन इन्फेक्शन का घरेलू नुस्खा है शहद का प्रयोग – UTI ke Ghrelu nuskhe me Shahad ka upyog hai asrdar in Hindi
  14. यूरिन ट्रेक्ट इन्फेक्शन में करें गाजर,चुकंदर और टमाटर का प्रयोग – Use carrot, beetroot and tomato in urinary tract infection in Hindi
  15. यूरिन इन्फेक्शन को दूर करे योग एवं प्राणायाम से -Get rid of urine infection with yoga and pranayam

जिसमे सबसे पहले है….

1.

पानी से दूर करे UTI इन्फेक्शन की समस्या

UTI इन्फेक्शन को दूर करने के लिए भरपूर मात्रा में पानी पीयें क्यों कि पानी में मौजूद विटामिन्स ,मिनरल्स हमारी बॉडी को डिटॉक्स रखते है और पेट संबंधी बीमारियों से छुटकारा दिलवाते है।

रोजाना पर्याप्त पानी पीना, शरीर से विषैले पदार्थ को बाहर निकालता है और UTI इंफेक्शन से भी बचाता है। अगर आप एल्केलाइन वाटर पीते है तो यह शरीर से निकलने वाले मूत्र से अम्ल प्रवत्ति को कम करता है। जो स्वाथ्य की दृष्टि से फायदेमंद होता है।

2.

यूरिनरी ट्रेक्ट से बचने के लिए करें क्रेनबेरी का उपयोग

UTI इन्फेक्शन से बचने के लिए क्रेनबेरी का जूस या सूखी क्रेनबेरी को खाया जा सकता है क्रेनबेरी खाने से यूटीआई इंफेक्शन को काफ़ी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, क्यों कि यूटीआई संक्रमण को रोकने में इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स, प्रोआंथोसायनिडिन्स (PACs) की भरपूर मात्रा होती है।

जो संक्रमण फैलने से रोकती है इन सबके अलावा क्रेनबेरी में विटामिन सी, विटामिन ए और फोलिक एसिड, फाइबर्स होते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। यह मूत्राशय को स्वस्थ रखने में मदद करता है और यूरीन के रास्ते को साफ करता है।

जरुरी चेतावनी

जिन लोगो को किडनी की प्रॉब्लम है वह क्रेनबेरी जूस न लें।

3.

प्राकृतिक पालक से हटाए (UTI infection)

पालक का नाम हरी पत्तेदार सब्जियों में सबसे ऊपर आता है अगर हम विभिन्न रूपों में इसका सेवन करते है (सब्जी /सूप ) तो बहुत सी बीमारियों को दूर करने में यह सबसे सर्वोत्तम विकल्प है फिर चाहे वह UTI की प्रॉब्लम ही क्यों न हो क्यों कि पालक में भरपूर मात्रा में आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन सी, बी,ई और फोलेट होते है।

इतना ही नहीं एंटीऑक्सिडेंट्स एवं एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते है जो UTI इंफेक्शन को कम करने और पेट के निचले हिस्से में अनुभव किए जा रहे दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं।

4.

अदरक से दूर करें यूरिनरी ट्रेक्ट की समस्या

यूटीआई संक्रमण (UTI infection )के खिलाफ अदरक एक नेचुरल उपाय है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल,एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटीऑक्सिडेंट्स गुण होते है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते है और UTI या किसी भी संक्रमण से लड़ने में मदद करते है।

इसके आलावा गिंजरोल नामक यूट्रेनिक तत्व होता है जो रोग प्रशरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है एवं संक्रमण फैलने से बचाता है। जिससे आपका शरीर संक्रमण के खिलाफ अधिक प्रतिरक्षात्मक होता है।

इन सभी गुणों के कारण, अदरक यूटीआई संक्रमण के खिलाफ एकइफेक्टिव  उपाय हो सकता है।

इस तरह से इस्तमाल करें –

  • यूरिन इन्फेक्शन से बचने के लिए अदरक का जूस एक चम्मच निकाल ले और शहद में मिक्स करके ले सकते है या फिर पानी में मिलाकर इसका ड्रिंक तैयार कर पी सकते है।

5.

यूरिन इन्फेक्शन का घरेलू उपाय है आंवला

विटामिन सी से भरपूर फल संतरा ,मौसंबी ,अंगूर ,टमाटर ,कीवी मूत्र संक्रमण से लड़ने एवं पेशाब को साफ़ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है जिसमें आंवला सबसे ज्यादा कारगर माना गया है।

आँवला में विटामिन सी होता है, कई एंटीऑक्सीडेंट्स एवं अत्यधिक प्राकृतिक गुण होते है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने,यूटीआई इंफेक्शन को कम करने में मदद कर सकता है।

इन सभी गुणों के कारण, अदरक यूटीआई संक्रमण के खिलाफ एकइफेक्टिव  उपाय हो सकता है।

इस तरह इस्तमाल करें –

  • हो सके तो खाली पेट दो चम्मच आवला जूस को दो चम्मच पानी के साथ मिलाकर पीये.सुबह सुबह लें।
  • इससे यूरिन से आने वाली बदबू भी दूर हटेगी और यूरिन साफ़ भी होगी।
  • इसका सेवन आप नियमित रूप से भी कर सकते है।

6.

यूरिन इन्फेक्शन से बचने का तरीका सेब का सिरका

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) से निजात पाने में सेब का सिरका एक नेचुरल उपाय हो सकता है। सेब सिरका में एंटीबैक्टीरियल ,एंटी ऑक्सिडेंट्सऔर अल्कलाइनिटीव् गुण होते हैं, जो यूटीआई के कारणों को कम कर सकते हैं।

सेब के सिरके में विटामिन C और अन्य आंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो इंफेक्शन के खिलाफ लड़ने और दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होते है।
सेब का सिरका मूत्र संक्रमण के दौरान आने वाली बदबू को कंट्रोल करता है।

इन सभी गुणों के कारण, अदरक यूटीआई संक्रमण के खिलाफ एकइफेक्टिव  उपाय हो सकता है।

इस तरह इस्तमाल करें –

  • सेब के सिरके की 2 चम्मच मात्रा लेकर एक पानी से भरे गिलास में मिला दें और फिर पीये।

सुबह और शाम इसे कम से कम 5 दिन तक लें।

7.

यूटीआई का घरेलू उपाय है बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा जो अक्सर हमारे घर के किचन में अवेलेबल रहता ही है वह मूत्र संक्रमण से निजात दे सकता है यह बात सुनकर आपको भी आष्चर्य हो रहा होगा। पर यह सच है कि बेकिंग सोडे की एक चम्मच मात्रा आपके शरीर में हो रही UTI इन्फेक्शन की समस्या को पूरी तरह ठीक कर सकती है।

बेकिंग सोडा यूरिन में मौजूद अम्ल की मात्रा को कम करता और पेशाब के PH लेवल को कम करता है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण संक्रमण से बचाने का काम करते है। इतना ही नहीं पेशाब करते समय आने वाली दुर्गन्ध को भी हटाता है।

इन सभी गुणों के कारण, अदरक यूटीआई संक्रमण के खिलाफ एकइफेक्टिव  उपाय हो सकता है।

इस तरह इस्तमाल करें –

  • एक गिलास पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर एक दिन में दो बार जरूर लें।

8.

यूरिन इन्फेक्शन से बचने तरीका है गर्म सेक

जब भी कभी पेट दर्द होता है या पेट में बार – बार मरोड़ उठती है तो हम गर्म पानी की सेक का उपयोग करते है ताकि दर्द से आराम मिल सके ,तो वहीं गर्म पानी की सेक UTI Problem में भी दर्द से राहत दिलाने का काम करती है इसके लिए आप वार्म वाटर बैग का इस्तमाल कर सकते है।

इस तरह इस्तमाल करें –

  • आजकल बाजार में इलेक्ट्रॉनिक वाटर बैग्स मिलने लगे है इन्हें आप कुछ मिनट के लिए चार्ज पर लगा दें बैग गर्म हो जाएगा इस बैग के अंदर आपको पानी भरने की भी आवश्यकता नहीं होती है।
  • रबर का वाटर बैग भी मिलता है जिसमें आपको पानी पहले गर्म करना होता है फिर बैग होता है इसका नोजल पैक कर लें। फिर इस बैग से अपने पेट के निचले हिस्से की सिकाई कर सकते है।
  • अगर आपके पास ये दोनों हे चीजें न हो तो भी आप सिकाई कर सकते है इसके लिए आपको एक प्रेस लगेगी और एक कॉटन का कपडा।
  • प्रेस गर्म कर ले फिर थोड़ी देर देर में कपडे को प्रेस पर रखकर गर्म करे और दर्द वाली जगह पर सिकाई करें।

9.

मूत्र मार्ग संक्रमण को रोके टी तट्री तेल

टी तट्री तेल यूरिन इन्फेक्शन से राहत दिलाने में बहुत ही मददगार हैं क्यों कि टी तट्री तेल (Tea tree oil) का डायरेक्ट इस्तमाल संक्रमण फैलने से रोकता है इसके विशेष गुण एंटीबैक्टीरियल,एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट्स रोगाणुओं का खात्माकर बैक्टेरिया को मारने का काम करते है।
साथ ही यूरिन से आने वाली बदबू को हटाता है इन्फेक्शन फैलने से रोकता है।

इसके आलावा गिंजरोल नामक यूट्रेनिक तत्व होता है जो रोग प्रशरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है एवं संक्रमण फैलने से बचाता है। जिससे आपका शरीर संक्रमण के खिलाफ अधिक प्रतिरक्षात्मक होता है।

इन सभी गुणों के कारण, अदरक यूटीआई संक्रमण के खिलाफ एकइफेक्टिव  उपाय हो सकता है।

10.

पेशाब नली में इन्फेक्शन रोकने का उपाय है अनानास

मूत्र संक्रमण रोकने का सबसे अच्छा और आसान तरीका है अनानास/पाइनेपल। क्यों कि विटामिन सी और फाइबर से भरपूर इस फल में बैक्टेरिया से लड़ने वाले गुण मौजूद होते है इतना ही नहीं संक्रमण को तेजी से फैलने और रोकने का काम अनानास आसानी से कर देता है।
पेशाबनली को स्वास्थ्य बनाए रखने में अनानास मदद कर सकता है। अनानास में पाया जाने वाला एन्जाइम ब्रोमेलेन भोजन को पचाने में मदद करता है। जो दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होता हैं।

इस तरह इस्तमाल करें –

  • कम से कम अनानास की 4 से 5 स्लाइस डेली खाये।
  • हो सके तो ताजे पाइनेपल(अनानास) का आधा गिलास जूस पिए।

11.

यूरिन इन्फेक्शन ठीक करे ब्लूबेरी से

UTI प्रॉब्लम को ठीक करने में ब्लूबेरी एक नेचुरल उपाय है विटामिन सी , एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटीबैक्टीरियल गुणो से भरपूर ब्लूबेरी पेट संबंधी विभिन्न बीमारियों को ठीक करने में कारगर सिद्ध हुई है, इसके इस्तमाल से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। और इन्फेक्शन फैलने से रुकता है यूरिन की थैली को साफ रखता है और बदबू भी नहीं आने देता।

इस तरह इस्तमाल करें –

  • सुबह सुबह नाश्ते में आप ब्लूबेरी ले सकते हैं।
  • या फिर ब्लूबेरी का जूस भी पी सकते है।

12.

यूरिन ट्रैक्ट इन्फेक्शन में करे नारियल पानी का प्रयोग

अगर आप यूरिन ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI ) से ग्रस्त है तो नारियल पानी आपके लिए रामबाण की तरह कार्य करता है इतना ही नहीं बॉडी को हायड्रेट, जरुरी मिनरल्स, पोषक तत्व प्रदान करता है अगर आप प्रेगनेंट महिला है और UTI जैसी गंभीर समस्या का सामना कर रही है तो बिना देरी किये नियमित रूप से इसे पीना शुरू कर दें।

इस तरह इस्तमाल करें –

  • नारियल पानी नियमित रूप से लेने पर डिहाइड्रेशन की समस्या से मुक्ति मिलती है।
  • इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स,एंटीबैक्टीरियल गुण पेशाब की सफाई और कीटाणुओं को मारने का काम करते है जिससे इन्फेक्शन कम होने लगता है।
  • UTI की समस्या से आराम भी मिलता है।

13.

यूरिन इन्फेक्शन का घरेलू नुस्खा है शहद का प्रयोग

यह तो हम सभी जानते ही है की शहद आयुर्वेद का सबसे औषधीय पदार्थ है जिसके बहुत से गुण शरीर को फायदा पहुंचाने का काम करते है फिर चाहे वह पेट से रिलेटेड हो या फिर त्वचा से। मूत्र संक्रमण की समस्या (UTI Infection ) का इलाज करने में शहद सहायक है शहद में एंटीबैक्टीरियल और एंटीइन्फ्लामेट्री गुण होते है जो संक्रमण फैलने से रोकता है और यूरिन को साफ करता है।

इस तरह इस्तमाल करें –

  • आप इसे नियमित रूप से इस्तमाल कर सकते है।
  • सुबह सुबह गर्म पानी में शहद मिलाकर पीयें इससे आपका ब्लड भी साफ़ होगा और यूरिन से बदबू भी नहीं आएगी।

14.

यूरिन ट्रेक्ट इन्फेक्शन में करें गाजर,चुकंदर और टमाटर का प्रयोग

हम अक्सर गाजर,चुकंदर और टमाटर को सलाद के रूप में तो खाते ही है पर अगर इन तीनों चीजों को साथ में मिलाकर एक ताजा ड्रिंक तैयार किया जाये और पिया जाये तो विभिन्न प्रकार की बीमारियों से आप छुटकारा पा सकते है।

जिसमें UTI की प्रॉब्लम को भी सॉल्व किया जा सकता है।

गाजर,चुकंदर और टमाटर में (लायकोपिन ),विटामिन C , एंटीबैक्टीरियल गुण होते है जो पेट साफ़ करने, दर्द से राहत देने का काम करते है।

इस तरह इस्तमाल करें –

  • आप गाजर,चुकंदर और टमाटर को अच्छे से धोकर साफ़ कर लें ,इन्हे बारीक़ काट कर कुकर में बॉईल कर लें फिर मिक्सी कि सहायता से पीस लें और इसका सूप बना लें।
  • जूसर की मदद से तीनो चीजें पीस कर इनका जूस निकाल लें हो सके तो इसमें थोड़े अदरक के टुकड़े और लहसन और मिला दें फिर इसे पीये।
  • जो आपकी बॉडी को एनर्जेटिक रखेगा ,पूरे दिन फुर्तीला रखता है आप नियमित रूप से पी सकते है। जिससे UTI की समस्या में सुधार हो सकता है।

15.

यूरिन इन्फेक्शन को दूर करे योग एवं प्राणायाम से

अगर आप पूरी तरह अपने आपको को फिट रखना चाहते है बीमारियों से अपने शरीर को बचाना चाहते है तो अपनी दिनचर्या में नियमित रूप से योगासन और प्राणायाम को शामिल करें क्यों कि प्राणायाम के जरिये आप इंटरनल बॉडी सिस्टम को स्ट्रांग रख सकते है और स्वसन तंत्र के साथ- साथ (UTI )यूटीआई जैसी प्रॉब्लम से निजात पा सकते है।

जाने विशेष प्राणायाम और योगासन-

  1. अनुलोमविलोम
  2. मंडूक आसन
  3. पवनमुक्तासन
  4. भुजंगासन

पेट दर्द के लिए दादी माँ के घरेलू नुस्खे

(Pet dard (Stomach Pain) ke liye Dadi Maa ke Gharelu Nuskhe in Hindi)

Synopsis: पेट दर्द (Stomach Pain) के लिए दादी माँ के घरेलू नुस्खे, उपाय

गर्मियों और सर्दियों के मौसम में खान पान का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए क्यों कि इन मौसमों में अक्सर किसी न किसी को पेट सबंधी समस्या हो ही जाती है इसमें चाहे आप बूढ़े हो , जवान हो या बच्चे ही क्यों न हो सबके लिए यह नुस्ख़े बड़े ही काम के है।

इस सीजन में कुछ भी उल्टा-सीधा खा लेने पर हमारे स्वस्थ पर बुरा असर पड़ता है लूजमोशन्स होने लगते है और बॉडी डीहाइड्रेट होने लगती है। ऐसे में खुद हो हाइड्रेट रखने के लिए बरसो से आजमाए गए दादी माँ के बताये नुस्खे बड़े ही काम के है।  मेरे सवाल के इस आर्टिकल में आप जानेंगे ऐसे ही तुरंत आराम दिलाने वाले

दादी माँ के बताये गए 5 घरेलू नुस्खे

 

1.पेट की समस्या में दिलाये आराम दादी माँ का नुस्खा “केला” खाएं

Kela (Banana)-Pet ke liye asardar dadi ma ka nuskha]

लूजमोशन्स की तकलीफ़ से अगर आप झूझ रहे हो तो तुरंत केला खाये क्यों की केले में भरपूर मात्रा में पोटेशियम और कैल्शियम होता है जो बॉडी हो एनर्जेटिक फील कराता है  इससे न सिर्फ आपके शरीर को ऊर्जा मिलेगी बल्कि लूज मोशन में भी आराम मिलेगा।

2.पेट के लिए असरदार दादी माँ का नुस्खा “जीरे” वाला पानी पिए

Jeera Pani : Pet ke liye asardar dadi ma ka nuskha jeere ka pani

अगर आपका पेट ज्यादा खराब रह रहा हो और बॉडी में लो एनर्जी फील हो रहा हो  तो जीरे का पानी आपके लिए बहुत ही फायदेमंद होगा  क्यों कि लूजमोशन्स में बॉडी पूरी तरह से डीहाइड्रेट हो जाती है ऐसे में जीरे का पानी आपके डिहाइड्रेशन की समस्या को दूर करेगा और ऊर्जा से परिपूर्ण रखेगा।

बनाने की विधी – (Method of preparation in hindi)

इसे बनाने के लिए 1 चम्मच जीरे को 1 गिलास जितना पानी लेकर एक तपेले में डाल कर उबाले जब तक यह आधा गिलास न हो जाये। फिर इस पानी को छान लें और ठंडा होने पर धीरे-धीरे पिए। पेट की समस्या से तुरंत आराम मिलेगा।

आप इस उपयोग को नियमित रूप से भी कर सकते है यह आपकी बॉडी से विषैले पदार्थो को भी बाहर निकालता है और शरीर एवं पेट को स्वस्थ रखता है।

3.नींबू ,नमक और शक़्कर” का घोल (पानी) दादी माँ का नुस्खा

Nambu,Namk Aur Shakkar ka pani dadi ma ka asardar nuskha

अगर आप पेट की समस्या से गुजर रहे है तो नींबू ,नमक और शक़्कर के घोल का मिश्रण दस्त या लूजमोशन जैसी समस्या से राहत दिलाने में कारगर उपाय है और यह सबसे आसान और दादी माँ के समय से आजमाया गया नुस्खा है जिसे आज के समय में डॉक्टर भी सलाह देते है।

बनाने की विधी – (Method of preparation in hindi)

1 गिलास पानी में , डेढ़ चम्मच शक़्कर (चीनी) मिला लें अब इसमें आधा चम्मच नमक मिला लें और अच्छे से घोले जब तक यह पूरी तरह से पानी में मिल न जाये। अब धीरे-धीरे इस पानी को पीये आपको पेट की समस्या हो या फिर लो बीपी (Low ) की समस्या आपको इससे तुरंत आराम मिलेगा।

4.पेट की समस्या से निजात पाए दादी माँ का नुस्खा “नारियल पानी”

Coconut Water -Pet ki samsya se nijat paaye dadi maa ka nuskha nariyal pani

यह तो हम सभी जानते ही है की नारियल पानी हर मौसम में उपलब्ध होने वाला प्रोडक्ट है जिसके बहुत से फायदे है चाहे वह शरीर में पानी की कमी को पूरा करना हो या फिर पेट के अंदर हो रही गर्मी को शांत करना या लूजमोशन की समस्या से आराम दिलाना हो।

सभी तरह से नारियल पानी पोषक तत्वों और मिनरल्स से भरपूर है चूकि लूजमोशन अक्सर पेट के खराब होने की वजह से ही होते है जिसके कारण शरीर का पूरा पानी बहार निकल जाता है और व्यक्ति थकाहारा महसूस करता है, ऐसे में नारियल पानी बहुत ही अच्छा स्त्रोत है पानी की कमी को पूरा करने, पेट को आराम देने और स्वस्थ रखने का।

5.पेट के लिए फायदेमंद दादी माँ का नींबू निचोड़ कर पीने का नुस्खा

Black salt and Lemon -Pet ke liye dadi ma ka nimbu aur kala namk nichod kr peene ka nuskha

लूजमोशन की समस्या से निजात पाने के लिए दादी माँ का यह नुस्खा बड़ा  ही फायदेमंद है खाना खाने के बाद आधा कप पानी में आधा नींबू निचोड़कर और उसमे थोड़ा सा काला नमक भी मिला दें फिर इस मिश्रण को पीये।

यह बॉडी में पानी की कमी को दूर तो करेगा ही और तो और पेट की पाचन शक्ति को भी सुधारेगा क्यों कि नींबू में साइट्रिक एसिड और एंटीबैक्टेरियल,एंटीसेप्टिक  गुण होते है जो पेट में उठने वाली मरोड़ और गैस से राहत दिलाता है एवं पाचन शक्ति को मजबूत बनाता हैं।

 

योग क्या है ? 5 महत्वपूर्ण प्राणायाम और उनका हमारे जीवन पर प्रभाव क्या है ?

(What is Yoga? 5 Important Pranayam and it’s effectiveness in Hindi)

Synopsis: योग क्या है? प्राणायाम क्या है ? 5 महत्वपूर्ण प्राणायाम और उनका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

मेरे सवाल के इस article में हम आपको बताने वाले है कि किस तरह आप योग एवं प्राणायाम (Yoga and Pranayam in hindi) के जरिये अपने दैनिक जीवन को सुखमय, आनंदमय एवं रोगमुक्त बना सकते है। लेकिन उससे पहले जान लेते है कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को…

वैसे तो प्राचीन काल से ही हम योग (Yoga) के बारे में सुनते आ रहे हैं, परंतु आज के समय में घर-घर तक योग को पहुंचाने का मुख्य कार्य “स्वामी रामदेव जी” ने ही किया है। इतना ही नहीं उन्होंने अपने जीवन का अमूल्य समय योग को ही दिया है और आज हम सभी योग, प्राणायाम को उनके माध्यम से ही जान पाए है। और यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं हैं।

अगर आप भी योग की महिमा से जुड़ना चाहते है अपने जीवन को रोगमुक्त, शांतिमय ,आनंदमय रखना चाहते है तो उनके द्वारा बताई गई अहम बातों को आप इस आर्टिकल के जरिये भी अपने जीवन में उतार सकते है।

जैसे –

  1. योग क्या है ?
  2. योग का हमारे जीवन पर प्रभाव क्या होता है ?
  3. क्या हमे नियमित रूप से योग करना चाहिए ?
  4. प्राणायाम क्या होता है ?
  5. प्राणायाम करने का सही तरीका क्या है ?
  6. कौन से मुख्य प्राणायाम है शरीर के लिए बेहद ही जरुरी ?
  7. क्या सिर्फ प्राणायाम की मदद से बड़ी से बड़ी बीमारियों को ठीक किया जा सकता है?

इन सभी सवालों के जवाबआपको मिलने वाले है क्यों कि अक्सर यही सब सवाल लोगों के मन में रहते है जब वह अपने जीवन में योग को शामिल करना चाहते है या फिर अपनाना चाहते है।

आइये एक-एक करके इन सभी प्रश्नो के जवाब हासिल करते है। ..

योग क्या है ? (What is Yoga in Hindi)

योग एक प्राचीन भारतीय विज्ञान संस्कृति  है जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए उपयोगी है। योग के माध्यम से हम अपने शरीर, मन, और आत्मा को संतुलित और संयमित बनाने का प्रयास करते हैं। एक संतुलित और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

योग के मुख्य अंग हैं (The main parts of Yoga in Hindi)

  • आसन (शारीरिक पोस्चर)
  • प्राणायाम (श्वास का नियंत्रण)
  • ध्यान (मन की एकाग्रता)
  • ध्यान (आत्म-अध्ययनयोग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है, बल्कि यह मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।

योग का हमारे जीवन पर प्रभाव क्या होता है? ( What is the effect of Yoga on our life)

अगर आप योग को पूरी तरह अपने जीवन में अपनाना चाहते है तो उसके लिए नियमित रूप से जल्दी उठकर , दैनिक कार्यो से निर्वित्त होकर सुबह-सुबह योग करें। योग की शुरुआत करने से पहले अपनी बॉडी को हल्का वार्म उप करे। इससे मांसपेशियाँ नरम होगी और हाथ पैरों का मोवमेंट्स भी आसानी से होगा।

योग करने का सही समय सुबह 5 बजे से 9 बजे तक है।

आप मांसपेशियों को सक्रीय करने के लिए सूक्ष्म प्राणायाम भी कर सकते है।

जैसे-

  • दोनों हाथो को सामने रखकर हाथों की दोनों कलाइयों की मुट्ठी बनाकर कुछ देर क्लॉकवाइज़ घुमाये कुछ देर एंटीक्लॉकवाइज घुमाये।
  • दोनों हाथों को कंधे पे रखकर कुछ देर क्लॉकवाइज़ घुमाये कुछ देर एंटीक्लॉकवाइज घुमाये।
  • इसी तरह पैरों को सामने रखके पंजों को कुछ देर क्लॉकवाइज़ घुमाये कुछ देर एंटीक्लॉकवाइज घुमाये।
  • पेरो की उंगलियों को अंदर बाहर करें।

क्या हमें नियमित रूप से योग करना चाहिए? (Should we do Yoga regularly)

अगर आप नियमित रूप से योग करते है तो आपका मन, सुख और शांति की तरफ आकर्षित होगा इतना ही नहीं आपको आपकी बॉडी हल्की महसूस होगी और दिनभर फ्रेशनेस और एनर्जी फील होगी। अपने शरीर को सुचारु रूप से चलाने के लिए योग तो नियमित रूप से करना ही चाहिए।

  • प्राणायाम क्या होता है? ( What is Pranayam in hindi)

    प्राणायाम योग का एक महत्वपूर्ण अंग है जो श्वास (सांसो) के नियंत्रण और प्राण के प्रवाह को संतुलित करने के लिए किया जाता है।

  • प्राणायाम करने का सही तरीका क्या है? ( What is the right way to do Pranayama in hindi)

    प्राणायाम में, आप अपने श्वास को नियंत्रित करते हैं, जैसे (सांस लेना और छोड़ना ) जिससे आपका मन शांत होता है प्राणायाम शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुधारता है। प्राणायाम के माध्यम से आप अपनी प्राण शक्ति को भी बढ़ा सकते हैं और आत्मा के अंश को जागृत कर सकते हैं।

  • कौन से मुख्य प्राणायाम शरीर के लिए बेहद ही जरुरी है? ( Which Pranayam are very important for the body in hindi)

    यहाँ 6 प्रमुख प्राणायाम शामिल हैं, जो एक विशेष तकनिकी पर काम करते है और हर प्राणायाम का एक अलग उद्देश्य है जो विभिन्न बीमारियों को ठीक करने में उपयोगी होते है।

    • भस्त्रिका प्राणायाम
    • कपालभाति प्राणायाम
    • अनुलोम-विलोम प्राणायाम
    • उज्जायी प्राणायाम
    • भ्रामरी प्राणायाम
    • शीतली/शीतकारी प्राणायाम।

    ये तकनीकें आत्म संवेदनशीलता को बढ़ाती हैं, मन को शांत करती हैं और सांत्वना प्रदान करती हैं।

    क्या सिर्फ प्राणायाम की मदद से बड़ी से बड़ी बीमारियों को ठीक किया जा सकता है?

  • भस्त्रिका प्राणायाम ( Bhastrika Pranayam in Hindi)

  • भस्त्रिका का अर्थ है धौंकनी अर्थात एक ऐसा प्राणायाम जिसमें लोहार की धौंकनी की तरह आवाज करते हुए वेगपूर्वक शुद्ध प्राणवायु को अन्दर लेते हैं और अशुद्ध वायु को बाहर फेंकते हैं। भस्त्रिका प्राणायाम के करने से विभिन्न बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। इस प्राणायाम से निम्नलिखित बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं जैसे
    • भस्त्रिका प्राणायाम से दमा का इलाज संभव है : भस्त्रिका प्राणायाम दमे की बीमारी के लिए लाभकारी हो सकता है और फेफड़ों को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
    • सांस की बीमारियाँ को ठीक किया जा सकता है भस्त्रिका प्राणायाम से : यह प्राणायाम सांस की समस्याओं जैसे कि श्वास रोग या ब्रोंकाइटिस को भी ठीक कर सकता है।
    • तनाव कम करने में कारगर भस्त्रिका प्राणायाम: भस्त्रिका प्राणायाम से मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है। अगर आप अपनी मानसिक स्थिति को स्थिर रखना चाहते है तो यह प्राणायाम आपके लिए बहुत ही फादेमंद है इससे मन शांत रहता है और सांसों पर नियंत्रण शरीर में ऑक्सीज़न से प्रवाह को आसान बनाता है।
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    भस्त्रिका प्राणायाम को निम्नलिखित तरीके से किया जाता है:

      • शांति प्राप्त करें: सबसे पहले, एक सुखासन में बैठें।
      • सबसे पहले सांस को अंदर फेफड़ो में भरें : अपनी नासिका से श्वास लेकर अपनी नाक को बंद करें।
      • उत्तेजक अवस्था: इसका मतलब है कि आपको अपने शरीर के सार्वभौमिक क्षेत्र में सांस लेनी होगी।
      • सांस छोड़ें: सांस को धीरे -धीरे से छोड़ें। यह ध्यान दें कि सांस को संवेदनशीलता के साथ छोड़ा जाए।
      • वापस से यही क्रिया दोहराते रहें। शुरुआत में कम से कम 10 से 15 मिनट जरूर करें।

इसे ध्यान और धैर्य से करें, और ध्यान दें कि आप इसे सीखने के लिए निरंतर प्रयास कर रहें है। यह सुनिश्चित करें कि आप इसे बिना किसी परेशानी के कर सकते हैं और अपने श्वास पर नियंत्रण कर सकते हैं।

2. कपालभाति प्राणायाम

(Kapalbhati Pranayama in Hindi)

कपालभाति प्राणायाम से भी निम्नलिखित बीमारियों को ठीक किया जा सकता है।

जैसे –

  • श्वासरोग(सांस )से जुड़ी बीमारिययों का इलाज कपालभाति प्राणायाम : कपालभाति प्राणायाम से श्वास रोगों जैसे कि “ अस्थमा, बीपी, ब्रोंकाइटिस” में आराम मिलता है।
  • दिल की बीमारियाँ ठीक करें कपालभाति प्राणायाम : इस प्राणायाम की मदद से हृदय के स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है, जिससे हृदय रोगों का जोखिम कम हो सकता है।
  • कपालभाति प्राणायाम दूर करें मस्तिष्क संबंधी समस्याएँ: कपालभाति प्राणायाम यदि आप करते है तो इससे मानसिक तनाव और मस्तिष्क को शांति देने में मदद मिलती है, जिससे अवसाद और चिंता जैसी समस्याएँ कम हो सकती हैं।
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कपालभाति प्राणायाम को निम्नलिखित तरीके से किया जाता है:

  • सबसे पहले, एक सुखासन या आसन में बैठें। अपने शरीर को एकाग्रचित्त रखें और मन को शांत करें।
  • प्राणायाम शुरू करने के पहले नासिका को साफ करें: अपनी नासिका से श्वास लें ताकि नासिका का मुख खुल जाए।
  • प्राणायाम की प्रक्रिया: अपनी श्वास को अंतर्निहित (अंदर की और लें )करें। सांस को धीरे-धीरे अपने नासिका से बाहर निकालें। इसके बाद, तेजी से अपने पेट को अंदर की ओर धकेलें।
  • फिर सांस निकालें: अपनी सांस को अंतर्निहित करने के बाद, आपको अपने पेट को धीरे-धीरे बाहर की ओर निकालना है। इसके दौरान, अपने नासिका को संरेखित रखें।
  • दोहराना: इस प्रक्रिया को कुछ समय तक जारी रखें, ध्यान रखते हुए कि सांस और पेट को सही ढंग से नियंत्रित किया जाता है। इस प्राणायाम को कम से कम 15 से 20 बार करें।

अच्छी प्रैक्टिस हो जाने के बाद समय को आधा घंटा या एक घंटे तक बढ़ा लें। इससे मोटापा नहीं बढ़ता और महिलाओं में PCOD की समस्या भी दूर होती है।

यह ध्यान और अभ्यास का काम है, इसलिए धैर्य और निरंतरता से इसे करते रहें। यदि आप प्राणायाम को सीख रहे हैं, तो एक अनुभवी योग शिक्षक से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।

3. अनुलोम-विलोम प्राणायाम

(Anulom-Vilom Pranayam in Hindi)

अनुलोम-विलोम प्राणायाम कई समस्याओं को ठीक करने में मदद कर सकता है। इस प्राणायाम को करने से निम्नलिखित बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं:

  • ब्लडप्रेशर ठीक करें अनुलोम-विलोम प्राणायाम : अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने से ब्लडप्रेशर को नियंत्रित किया सकता है और उच्च रक्तचाप (हाई ब्लडप्रेशर) से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकता है।
  • नींद की समस्या से दिलाये राहत अनुलोम-विलोम प्राणायाम : इस प्राणायाम का नियमित अभ्यास करे से नींद की समस्याएँ कम हो सकती हैं और अनिद्रा को दूर किया जा सकता है।
  • मानसिक तनाव कम करने के लिए करें अनुलोम-विलोम प्राणायाम : मानसिक तनाव को कम करने में अनुलोम-विलोम प्राणायाम मदद कर सकता है जो मन को शांति प्रदान करता है।
  • अस्थमा की बिमारी दूर करने में सहायक अनुलोम-विलोम प्राणायाम : यह प्राणायाम फेफड़ों को मजबूत करने में मदद करता है जिससे अस्थमा के लक्षणों को कम किया जा सकता है।
  • सांस संबंधी प्रॉब्लम्स में राहत दें अनुलोम-विलोम प्राणायाम : अनुलोम-विलोम प्राणायाम सांस की समस्याओं जैसे कि श्वास रोग या ब्रोंकाइटिस को भी ठीक कर सकता है
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अनुलोम-विलोम प्राणायाम को निम्नलिखित तरीके से किया जाता है:

  1. सबसे पहले, एक सुखासन या आसन में बैठें। अपने शरीर को सीधा करें और मन को शांत करें।
  2. नासिका को साफ रखे : अपनी नासिका से श्वास लें ताकि नासिका का मुख खुल जाए।
  3. प्राणायाम की प्रक्रिया: अब, आपको अपने दाहिने नासिका के माध्यम से अंतर्निहित (अंदर की और ) श्वास (सांस ) लेना है। ध्यान रखें कि आपका बायां नासिका बंद रहे।
  4. सांस को छोड़े : अब आपको अपने दाहिने नासिका को बंद करके बायां नासिका के माध्यम से सांस बाहर निकालनी है।
  5. दोहराएं: इस प्रक्रिया को कुछ समय तक जारी रखें, ध्यान देते हुए कि आप नियमित और समय अंतराल के साथ श्वास ले रहे हैं।

कम से कम आधा घंटा इस प्राणायाम को करें।

धैर्य और निरंतरता से इसे करते रहें। यदि आप प्राणायाम को सीख रहे हैं, तो एक अनुभवी योग शिक्षक से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।

4. उज्जायी प्राणायाम  (Ujjayi Pranayam in Hindi)

उज्जायी प्राणायाम की मदद से कई समस्याओं को ठीक करने में मदद मिलती है। इस प्राणायाम से निम्नलिखित बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं:

  • थायराइड समस्याएँ दूर करें उज्जायी प्राणायाम : जिन लोगों को थायराइड का प्रॉब्लम है, यह प्राणायाम थायराइड को संतुलित करने में मदद कर सकता है और थायराइड समस्याओं को कम कर सकता है।
  • उच्च रक्तचाप (हाई ब्लडप्रेशर) ठीक करें उज्जायी प्राणायाम : उज्जायी प्राणायाम से रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और उच्च रक्तचाप से जुड़ी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
  • उज्जायी प्राणायाम बुद्धिमत्ता को बढ़ाने में सहायक : यह प्राणायाम मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है और मन ,शरीर को शांति प्रदान कर सकता है, जिससे बुद्धिमत्ता और ध्यान की क्षमता बढ़ती है।
  • स्नायुशोथ कम करने में सहायक उज्जायी प्राणायाम : उज्जायी प्राणायाम शरीर के स्नायुशोथ को कम करने में मदद कर सकता है और संबंधित दर्द को राहत प्रदान कर सकता है।
  • श्वास रोग से मिले राहत उज्जायी प्राणायाम से : उज्जायी प्राणायाम फेफड़ों को मजबूत बनाता है और श्वास रोगों को कम कर सकता है।
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उज्जायी प्राणायाम को निम्नलिखित तरीके से किया जाता है:

  1. स्थिर सबसे पहले, आरामपूर्वक बैठें या आसन में बैठें। आपकी पीठ सीधी होनी चाहिए और कंधे नीचे होने चाहिए।
  2. गहरी सांस लें: अपनी नासिका से श्वास लें और ध्यान दें कि आपकी सांसें धीरे-धीरे हो रही हैं।
  3. गला बंद करें: सांस को धरने के बाद, अपने गले को बंद करें, लेकिन अपनी नाक से श्वास लेने का प्रयास “न” करें।
  4. ध्वनि उत्पन्न करें: अब, अपने गले को बंद करके सांस लेते हुए, सांस को धीरे-धीरे छोड़ते समय, अपने गले में “हाँ” की ध्वनि उत्पन्न करें।
  5. सांस छोड़ें: ध्यान दें कि सांस को धीरे-धीरे छोड़ें और ध्यान दें कि आपकी सांस का प्रवाह हो।

उज्जायी प्राणायाम को सीखने में समय लगता है, लेकिन नियमित अभ्यास से आप इसे सीख सकते हैं। यदि संभव हो, तो एक अनुभवी योग गुरु के मार्गदर्शन में इसे सीखना फायदेमंद हो सकता है।

5. भ्रामरी प्राणायाम  (Bhramari Pranayam in Hindi)

भ्रामरी प्राणायाम मानसिक शांति से जुड़ा प्राणायाम है इससे निम्नलिखित बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं:

  • भ्रामरी प्राणायाम से तनाव और चिंता दूर करें : यह प्राणायाम मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है।
  • उच्च रक्तचाप कम करे भ्रामरी प्राणायाम : लगभग हर प्राणयाम से बीपी कंट्रोल होता है जिसमे भ्रामरी प्राणायाम भी शामिल है जो रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है और हाई ब्लडप्रेशर से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकता है।
  • मानसिक तनाव को शांत करे अवसाद से बचाये भ्रामरी प्राणायाम : यह प्राणायाम मानसिक तनाव को कम करने,अवसाद से बचाने में मदद करता है और मन को शांति प्रदान कर सकता है।
  • भ्रामरी प्राणायाम से मानसिक तत्वों का संतुलन सुधरता है : यह प्राणायाम मानसिक तत्वों को संतुलित करने में मदद करता है और मन की स्थिति को स्थिर बनाता है।
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यह प्राणायाम न केवल बड़ो के लिए फायदेमंद है बल्कि बच्चों के लिए भी बहुत ही पॉवरफुल प्राणयाम है। दिमाग को और ज्यादा सक्रीय, तीव्र बनाता है एवं मेमोरी कॉन्सेंट्रेशन भी बढ़ाता है..

12 “रामबाण” नुस्खे जो तुरंत आराम दिलाए

(12 Ramban nuskhe in Hindi)

Synopsis: रामबाण नुस्खे जो आपको स्वस्थ रहने में मदद कर सकते हैं

दादी माँ के बताये नुस्खे जो बरसो से चले आ रहे है जो असरदार भी होते है और किसी भी प्रॉब्लम का झटपट इलाज करते है, मेरे सवाल के इस आर्टिकल में आप ऐसे ही 12 “रामबाण” घरेलू नुस्खों के बारे में जानकारी हासिल करेंगे।

आपको बता दें रामबाण इलाज में काम आने वाले सभी मसाले हमें हमारे घर के  किचन में ही मिल जायेंगे। इन सभी घरेलू सामान के जरिये शरीर में हो रही प्रॉब्लम से तुरंत छुटकारा पाया जा सकता है। दादी मां के घरेलू नुस्खे अक्सर बहुत ही प्रभावी होते हैं।

यहाँ कुछ ऐसे ही रामबाण नुस्खे हैं जो आपको स्वस्थ रहने में मदद कर सकते हैं:

जैसे –

  1. हल्दी और दूध का उपयोग करें : अगर किसी को सर्दी, जुखाम और गले का इंफेक्शन हो तो दूध हल्दी सबसे पहले दिया जाने वाला दादी माँ नुस्खा है। हर घर में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। गरम दूध में हल्दी मिलाकर पीने से शरीर को बेहतरीन लाभ मिलते है नींद अच्छी आती है। और यह बच्चो को दिया जाने वाला कारगर नुस्खा है, जिसे नियमित रुप से देना चाहिये।
  2. गुड़ और सोंठ का लड्डू वजन बढ़ाने में उपयोगी : जिन लोगों का वजन जल्दी नहीं बढ़ता है और वह वजन हो लेकर चिंतित रहते है उन्हें गुड़ और सोंठ का लड्डू खाना चाहिए जिससे वजन बढ़ाने, ताजगी और ऊर्जा से भरपूर रखने में काफी मदद मिलेगी।
  3. नींबू पानी दूर करे शरीर की गर्मी : गर्मियों के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद ही जरूरी होता है ऐसे में नींबू पानी पीना शरीर को ठंडक प्रदान करता है और विटामिन सी का स्रोत बनता है।
  4. अजवाइन और हींगका पानी : अगर आपको बदहजमी रहती हो, जी मिचला रहा हो, ऐसे में अजवाइन और हींग को गर्म कर पानी में मिलाकर पीने से पेट की समस्याओं में राहत मिलती है।
  5. तुलसी का पत्ता हर मर्ज़ की दवा : अगर आपको ख़ासी कफ बना रहता हो तो तुलसी के पत्तो से बना काढ़ा खाँसी, जुखाम और सामान्य बुखार में लाभकारी होता है।
  6. अदरक, लहसुन और शहद दादी माँ का असरदार नुस्खा : इन तीनो चीजों को मिलाकर सुबह खाली पेट खाने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और इम्यूनिटी बढ़ती है।
  7. बालों की जड़ो के लिए तेल मालिश: अगर आपके बाल झड़ रहे हो तो नियमित तौर पर तेल की मालिश करे जिससे बालो की जड़े मजबूत रहेगी और बाल कम टूटेंगे। आमला तेल, और जैतून तेल का नियमित उपयोग बालों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।
  8. गर्म नमक के का पानी कुल्ला करें : गले में खराश, गले की खराश, या नाक की बंदिश के लिए गर्म पानी में एक चम्मच नमक डालकर कुल्ला करें लाभकारी होता है।
  9. गुड़ और हल्दी- अगर आपके छोटे बच्चे हो या घर में कोई भी बड़ा बुजुर्ग हो, किसी को भी लगातार ख़ासी चल रही हो तो गुड़ के साथ हल्दी मिला के देने से खासी में तुरंत आराम मिलता है और खासी चलना बंद हो जाती है।
  10. लिवर को सुचारु रूप से चलाए लहसुन की कलियाँ – गाय के देसी घी में लहसुन की चार से पांच कलियों को भून लें और इसका सेवन करे भुनने से इसकी तामसिकता कम हो जाती है और वह डाइजेशन में मदद देता है और फैटी लिवर की समस्या से निजात भी मिलती है।
  11. एसिडिटी, शुगर की बीमारी, त्वचा रोग और गठिया (आर्थराइटिस) के रोगियों का एक मात्र इलाज है एलोवेरा –एलोवेरा के सेवन से न केवल चेहरे और शरीर की स्किन(त्वचा )अच्छी रहती है बल्कि इसके साथ-साथ एसिडिटी, गठिया संबंधी रोग (आर्थराइटिस) एवं शुगर की बीमारी भी ठीक होती है।
  12. सिर के आधे हिस्से में दर्द होना –अगर आपके सिर के आधे हिस्से में दर्द हो तो देसी घी की जलेबी खा कर दूध पी लेने से तुरंत आराम मिलता है।याद रखें, यह दादी माँ के बताये नुस्खे मददकारी तो हैं ही ,लेकिन अगर कोई गंभीर समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह लेना ही उत्तम होता है।

सर्दी-खांसी और जुकाम की समस्या से निजात पाने के आसान 12 घरेलू उपाय

12 Home remedies for Cough-Cold and Flu in Hindi

Synopsis: सर्दी -खांसी और जुकाम होने का मुख्य कारण , सर्दी-खांसी और जुकाम से निजात पाने के आसान 12 दादी माँ के घरेलू उपाय

ठंड के मौसम की शुरआत होते ही एक समस्या अक्सर लोग फेस करते है और वह है सर्दी-खांसी जिसे नॉर्मल भाषा में कफ एंड कोल्ड (Cough And Cold) भी कहा जाता हैं। सर्दी आते ही जहाँ देखो वहाँ  से खांसने और छींकने की आवाजें सुनाई देती है, बस यही एक मेन कारण है फ्लू (Flu) याने जुक़ाम होने का और सर्दी-खांसी होने का, क्यों कि सर्दी के दौरान बैक्टेरिया इन्फेक्शन (infection) इतनी जल्दी एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है की आपको पता भी नहीं चलता और आप सर्दी-ख़ासी की चपेट में आ जाते है और इसकी चपेट से बाहर आने में कई बार 1 से 2 हफ्ते का समय भी लग जाता है।

ऐसा जरुरी नहीं है की हर बार कुछ हो और आप डॉक्टर्स के पास जाए आज के इस आर्टिकल में हम आपको सर्दी-खांसी और जुकाम से राहत दिलवाने वाले ऐसे घरेलू उपाय बताने वाले है जो वापरे और आजमाए गए है आप जरूर से इन्हे ट्राय करे और घर बैठे सर्दी-खांसी की समस्या से निजात पाए। लेकिन उससे पहले इसके होने का कारण जान लेते है।

सर्दी -खांसी और जुकाम होने का मुख्य कारण

(The main reasons behind cough, cold and flu in Hindi)

सर्दी और खांसी होने के मुख्य कारण इस प्रकार हैं….

1. वायरस इन्फेक्शन:
ज्यादातर समय वायरस ही सर्दी और खांसी के कारण होते हैं, जैसे कि इंफ्लुएंजा वायरस या साइनसाइटिस। जो एक व्यक्ति के छीकने पर वातावरण में फैल जाते है और दूसरा व्यक्ति चपेट में आ जाता है।

 2. बैक्टीरियल इन्फेक्शन:
कभी-कभी यह बैक्टीरियल संक्रमण भी हो सकता है, जैसे कि बैक्टीरियल ब्रोंकाइटिस या साइनसाइटिस।

3.

3 पर्यावरणीय कारण:

ठंडक, बर्फ, या वायुमंडल में बदलाव के कारण भी सर्दी और खांसी हो सकती है। 

4. एलर्जी: धूल, कीटाणु, या अन्य एलर्जेन्स के कारण भी हो सकती है।

 5. वायरल संक्रमण (जैसे कि COVID-19): अब वायरल संक्रमण, जैसे कि कोरोना वायरस, भी एक आम कारण बन रहा है।

6. धूम्रपान: धूम्रपान करने वालों में सर्दी और खांसी होने की संभावना बढ़ सकती है।

7. नाक और गले में सूजन (इंफ्लेमेशन): नाक और गले में सूजन के कारण भी सर्दी और खांसी हो सकती है।

8. मौसम के परिवर्तन : मौसम के परिवर्तन के साथ आने वाली ठंडक और बदलती हवा के कारण भी सर्दी और खांसी हो सकती है।

चलिए जानते है,

सर्दी-खांसी और जुकाम में दिलाए राहत, कारगर घरेलू उपाय (होम रेमेडीज) विस्तार से

जो कुछ इस प्रकार है….

अदरक, तुलसी और हल्दी का काढ़ा (Decoction of ginger, basil and turmeric):

अदरक,तुलसी और हल्दी का काढ़ा एक अच्छा घरेलू उपाय है, जो सर्दी और खांसी को आराम पहुंचा सकता है।

अदरक(Ginger): अदरक में एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं साथ ही गिंजरॉल, शोगोल, और जिंजेरोन जैसे तत्व होते हैं, जो खांसी, ठंड और साइनस संबंधित समस्याओं से आराम प्रदान करने में सहायक होते हैं।

तुलसी (Holy Basil): हमारे घर में तुलसी का पौधा होता ही है जो किसी औषधि से कम नहीं हैं। यह हम सब जानते है पर क्या आपको पता है तुलसी के पत्तो में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं जो तनाव को कम करने ,मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक होते हैं। तुलसी में मौजूद विटामिन सी और विटामिन ए सर्दी- खांसी के इलाज में रामबाण है।

हल्दी (Turmeric): हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टेरियल गुण, कर्कुमिन नामक एक तत्व की वजह से होते हैं । इसमें विटामिन सी और विटामिन बी6 होते हैं, जो स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं जैसे खांसी और सर्दी से राहत प्रदान करने में मदद करता है।

कैसे उपयोग करें ?

1 कप पानी में कुछ पत्ते तुलसी के,एक से दो चुटकी हल्दी का पाउडर और अदरक कीस कर डाले और कुछ देर पानी को उबाल लें जब तक वह आधा कप न हो जाए।

इसे छान कर हल्का ठंडा होने दें फिर गले में सेक लगे उतना धीरे-धीरे पीये।

नियमितता

  • कम से कम 2 से 3 दिन लगातार उपयोग करें ।
  • इस काढ़े को आप दिन में 2 बार लें सुबह और रात।

सावधानी

  • इसके ऊपर सादा पानी बिल्कुल न पीये।

2. सर्दी खांसी का रामबाण अदरक और शहद
(Sardi khasi ka ramban elaj in Hindi)

खासी और सर्दी से राहत दिलाने में अदरक और शहद रामबाण की तरह कार्य करता है घर में छोटे बच्चे हो या फिर बड़े-बुजुर्ग सबके लिए यह नुस्खा बेस्ट है और दादी-नानी के टाइम से चला आ रहा सरल उपाय है।

कैसे उपयोग करें ?

अदरक का 1 से 2 इंच का टुकड़ा लें उसे खलबत्ते की सहायता से कूट ले फिर मिक्सी में पीस लें , इसे पतले कपडे में रख कर निचोड़ ले और इस रस को एक कटोरी में लेकर इसमें 1 चम्मच शहद मिला दे और खा लें।

नियमितता

  • कम से कम नियमित रूप से लगातार उपयोग करें ।
  • 3 से 4 दिन में आपकी सर्दी खासी छूमंतर हो जाएगी।

सावधानी

  • इसके ऊपर सादा पानी बिल्कुल न पिए।

3. लौंग एवं नीलगिरी का तेल सर्दी-खासी में दिलाये राहत
(Clove and eucalyptus oil provide relief from cold and cough in Hindi)

लौंग और नीलगिरी का तेल सर्दी और खांसी के लिए एक उपयोगी और तीव्रता से आराम पहुंचाने वाला उपचार है जिसमें कई उपयोगी गुण होते हैं:

लौंग (Clove) का तेल :  लौंग में एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो  इंफेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं। लौंग का तेल सूखी और बलगम वाली खांसी को राहत प्रदान कर सकता है और इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करने और सर्दी खासी से तुरंत राहत देने का काम करते हैं।

 नीलगिरी (Eucalyptus) का तेल : अगर आपकी नाक बंद हो रही हो और सास लेने में बहुत दिक्कत महसूस हो रही हो तो आपको नीलगिरि के तेल का इंहेलेशन ले लेना चाहिए जो खांसी को कम करने में सहायक हो सकता है।

कैसे उपयोग करें ?

इन तेलों का इस्तमाल करने के लिए एक कॉटन बॉल ले, फिर दोनों में से एक तेल का चुनाव कर से कॉटन में लेकर 2 से 3 मिनट सूंघे।

नियमितता :
दिन में 2 से 3 बार इन तेलों को सूंघे।

सावधानियाँ :

  • तेलों का सेवन बाहरी रूप इस्तमाल करें।
  • गर्भावस्था या छोटे बच्चों के लिए तेल का उपयोग करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

गरम दूध और हल्दी सर्दी-खांसी का घरेलू उपचार
(Home remedy for cough and cold with warm milk and turmeric in Hindi)

दूध प्रोटीन, हड्डियों को मजबूत बनाने, लैक्टिक अम्ल से भरपूर स्त्रोत है तो वही हल्दी में मौजूद एंटी बैक्टेरियल, एंटी इन्फ्लामेट्री और एंटीसेप्टिक गुण सर्दी-खांसी और जुकाम में राहत पहुंचाने का काम करते हैं।

कैसे उपयोग करें ?

1 कप दूध में 2 से 4 पिंच हल्दी मिला के उबाल लें अगर आपको थोड़ा मीठा टेस्ट चाहिए तो इसमें थोड़ी सी चीनी मिला दें और 5 से 6 मिनट अच्छे से उबाल ले, जब तक उसका कलर पीला न हो जाये फिर हल्का गुनगुना रहने पर धीरे-धीरे इसे पीये।ताकि गले में सिकाई लगे और सर्दी और खांसी में आराम मिल सकें।

नियमितता :

  • जहाँ तक हो सके एक नियम बांध लें।
  • रात को सोने से आधा घंटा पहले दूध पी लें।
  • हल्दी का दूध इम्युनिटी बढ़ाने और सर्दी खासी से आराम दिलाने का काम करता हैं।

सावधानियाँ:

  • हल्दी दूध के ऊपर पानी बिलकुल न पीये।
  • ज्यादा गर्म दूध न पीये ,हल्का गुनगुना करके ही  पीये।

5. अजवाइन का पानी सर्दी और खांसी के लिए एक उपयुक्त घरेलू उपाय
(Celery water is a suitable home remedy for cold and cough in Hindi)

अजवाइन में एंटिसेप्टिक गुण , विटामिन सी और विटामिन ए होते हैं जो साइनस संबंधित समस्याओं, इम्यून सिस्टम को मजबूती, नाक बंदी और सूजन जैसी बीमारियों से राहत एवं सर्दी खासी से निजात पाने के लिए एक अचूक औषधि की तरह कार्य करती है।

अजवाइन का पानी खांसी और सर्दी से होने वाली सूजन और तकलीफ में राहत प्रदान कर सकता है।

कैसे बनाएं अजवाइन का पानी?

एक चम्मच अजवाइन को पानी में डालें और उबालें।
जब पानी आधा रह जाए, इसे ठंडा होने दें और फिर इसे छान लें।
इस पानी को धीरे-धीरे से पीना चाहिए।

नियमितता:

  • हो सके तो हफ्ते में 2 से 3 दिन इस नियम को करें।
  • एक से दो दिन में आपको अंतर दिखने लगेगा।
  • यदि किसी को अधिक तकलीफ है या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

सावधानियाँ:

  • गरमी के दिनों में इसका सेवन समय समय पर करें।
  • अधिकतम मात्रा का उपयोग बिल्कुल न करें।

6.शिलाजीत और केसर का दूध सर्दी खांसी का घरेलू उपाय
(Shilajit and saffron milk home remedy for cough and cold in Hindi)

शिलाजीत: शिलाजीत रोगो से लड़ने ,शरीर को बल, ऊर्जा और स्थैतिक शक्ति प्रदान करने का काम करता है इसमें विभिन्न विटामिन, खनिज और एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं।

केसर: केसर में  वितामिन C, एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण  होते है, जो मानसिक स्थिति को बेहतर बनाए रखने , इम्युनिटी बूस्ट करने,रोगो से लड़ने और सर्दी खांसी से राहत दिलाने का काम करती है। शिलाजीत और केसर का दूध सर्दी और खांसी के लिए एक फायदेमंद घरेलू उपाय हो सकता है।

शिलाजीत और केसर का दूध कैसे बनाए ?

एक बगोने या तपेले में दूध गरम करें और उसमें शिलाजीत की पिस्ती डालें।अच्छे से मिलाएं ताकि शिलाजीत दूध में अच्छे से मिल जाए।अब केसर के धागे डालें और उन्हें अच्छे से मिलाएं। इसे धीमी आंच पर रखें और 5-7 मिनट तक उबालने दें।अब इसमें आवश्यकता के अनुसार 1 चम्मच शहद मिला दें। तैयार किया हुआ दूध गरमा गरम पीने से सर्दी और खांसी में आराम मिल सकता है।

नियमितता :

  • हो सके तो हफ्ते में 2 से 3 दिन इस नियम को करें।
  • एक से दो दिन में आपको अंतर दिखने लगेगा।

सावधानियाँ:

  • शिलाजीत और केसर का सेवन मात्रा को ध्यान में रखते हुए करें।
  • अधिकतम मात्रा का उपयोग बिल्कुल न करें।
  • इसे खाली पेट या सोने से पहले पीना सही है।

गर्भवती महिलाओं को, या किसी भी विशेष स्थिति में इसे सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

7. गुड़ और हल्दी का 3 बार प्रयोग जड़ से खत्म करे सर्दी और खांसी
(Use jaggery and turmeric 3 times to eliminate cough and cold completely in Hindi)

गुड़ और हल्दी का कॉम्बिनेशन खासी और सर्दी जैसी जकड़न बीमारी से तुरंत राहत दिलाने में सहायक होता है।

गुड़ में भरपूर मात्रा में आयरन होता है जो बीमारी से लड़ने, खून की कमी को दूर करने, कफ और साइनस समस्याओं को कम करने में मदद करता हैं।

हल्दी मैं मौजद एंटीफंगल बैक्टेरियल, एंटी इन्फ्लामेट्री और एंटीसेप्टिक गुण सर्दी-खांसी और जुकाम में राहत पहुंचाने का काम करते हैं।

 कैसे उपयोग करें ?

यह नुस्खा आप बच्चो से लेकर बड़े-बुजुर्गो पर भी आज़मा सकते है यह खांसी से तुरंत आराम दिलाता है इसके लिए गुड़ को चाकू की सहायता से पतला-पतला काट लें ,फिर इसमेंआधा चम्मच हल्दी मिला दें और छोटी गोली बना कर अपने बच्चो और परिवार वालो को दें।

 नियमितता:

  • इसका नियमित सेवन आप दिन में 3 बार करे सुबह ,दोपहर और शाम।
  • 3 से 4 दिन में आपकी सर्दी और खांसी छूमंतर हो जाएगीऔर जुकाम में भी राहत मिलेगा।

सावधानियाँ

  • हो सके तो गर्मी में इसका प्रयोग कम करें क्यों कि हल्दी गर्म होती है,जो गर्मी में गर्म भी कर सकती है।
  • यह प्रयोग ठंड के लिए उपयुक्त है जो खांसी से रिलीफ देने में उपयुक्त है।

8. बादाम और काली मिर्च का घरेलू उपाय सर्दी खांसी के लिए
(Almond and black pepper home remedy for cold and cough in Hindi)

यह तो हम सभी जानते है की बादाम सर्दियों में कितना फायदा करता है और डेली इसका सेवन शरीर में स्फूर्ति लाने ,दिमाग को तेज़ करने में महत्वपूर्ण होता है बादाम में भरपूर मात्रा में फाइबर और विटामिन E होता है जो सर्दी खासी के इलाज में किसी रामबाण से कम नहीं है।

काली मिर्च न केवल एक गरम मसाला है जो खाने को स्वादिष्ट बनाता है, बल्कि इसमें कई स्वास्थ्य लाभकारी गुण भी होते हैं। काली मिर्च पाचन को सुधारने, वात, पित्त, और कफ को संतुलित करने  में मददगार होती है साथ सर्दी खासी से राहत दिलाने का भी काम करती है।

9. गर्म पानी में शहद सर्दी खासी का घरेलू उपचार
(Honey in warm water home remedy for cough and cold in Hindi)

शहद में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल ,एंटी ऑक्सीडेंट्स  गुण,और पौष्टिक तत्व  होते हैं जो बैक्टीरिया और वायरसों से लड़कर शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं साथ ही इम्यून सिस्टम को मजबूती प्रदान करने,खांसी और सर्दी को कम करने में सहायक होता है।

कैसे उपयोग करें?

1 गिलास पानी को तपेली में लेकर गर्म करे फिर इसमें 1 चम्मच शहद मिला दें।

और हल्का गुनगुना कर पीये।

 नियमितता:

हफ्ते में नियमित रूप इस्तमाल करे 2 टाइम पीये।
सुबह खाली पेट और रात के समय।

सावधानियाँ:

  • ज़्यादा गर्म पानी का सेवन न करे, इससे पेट में गर्मी भी बढ़ सकती है।
  • शहद का इस्तमाल अधिक मात्रा में न करें।

इस नुस्खे को गर्मी में कम इस्तमाल करें।

10. गर्म पानी में नमक और हल्दी सर्दी खासी का घरेलू उपचार
(Salt and turmeric in warm water home remedy for cold and cough in Hindi)

अगर आपका गला ख़ास-ख़ास कर भारी हो गया हो और आप गले में आराम चाहते है तो अपने गले की सिकाई नमक और हल्दी के पानी से कर सकते है।

नमक में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं जो बैक्टीरिया को मारने में मदद करते हैं, जिससे सर्दी और जुकाम कम हो सकता है। इसमें मौजूद गरम और शीतल गुण सूजन और खांसी को कम करने में सहायक हो सकता है।

कैसे उपयोग करें ?

1 गिलास पानी को तपेली में लेकर गर्म करे फिर इसमें 1 चम्मच हल्दी और नमक  मिला दें और हल्का गुनगुना होने पर इस पानी से ग़रारे करें।

नियमितता:
हफ्ते में नियमित रूप इस्तमाल करे 2 टाइम गरारे करें ।
सुबह खाली पेट और रात के समय।

सावधानियाँ:

  • ज़्यादा गर्म पानी का सेवन न करे।
  • इससे गले में छाले भी हो सकते है।
  • यदि आपको किसी तरह की एलर्जी है या कोई विशेष स्थिति है, तो डॉक्टर से सलाह लें।

11. अंगूर और संतरे का प्रयोग सर्दी खांसी का इलाज
(Use of grapes and oranges to treat cough and cold in Hindi)

अंगूर (Graps) : अंगूर में विटामिन सी की अच्छी मात्रा होती है जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है एवं अंगूर की गरमी शरीर की सूजन को कम करने में सहायक होती है और खांसी में राहत प्रदान करती है।

संतरा (Orange): संतरे में भरपूर मात्रा में विटामिन सी होता है जो शरीर को ठंडक पहुंचाने में मदद और खांसी को कम करने में सहायक होता है। संतरा श्वसन संबंधित समस्याओं में आराम प्रदान करने में मदद करता है और सर्दी खांसी को दूर करने में मदद करता  हैं।

कैसे उपयोग करें ?

अंगूर और संतरे का रस: अंगूर और संतरे का रस मिलाकर पीने से सर्दी और खांसी में राहत मिल सकती है। इनमें विटामिन सी की मात्रा होती है जो इम्यून सिस्टम को मजबूती प्रदान कर सकती है और श्वासनल संबंधित समस्याओं में आराम प्रदान कर सकती है।

नियमितता:

सर्दी और खांसी के लिए अन्य चिकित्सा उपायों के साथ इन घरेलू उपचारों का समय-समय पर उपयोग करें।

सावधानियां:

  • अगर आपको किसी तरह की एलर्जी है, तो डॉक्टर से परामर्श करें।
  • गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इस उपाय से पहले डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

12. केसर का दूध सर्दी और खांसी में आराम दायक
केसर का दूध सर्दी और खांसी में आराम दायक

केसर (Saffron) : केसर में एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन C ,विटामिन A और विटामिन B होते हैं जो इम्यून सिस्टम को मजबूती ,शरीर में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने एवं चिंता, और सर्दी खांसी कम करने में सहायक होते है।

कैसे उपयोग करें ?

केसर की गर्माहट ठंड में शरीर को गर्म रखने, सर्दी खासी के इलाज में रामबाण की तरह कार्य करती है। एक तपेली में दूध गरम करें लेकिन उसे उबालने नहीं दें। केसर के कुछ धागो को पहले दूध में  भिगोकर रखें, ताकि रंग छूट सके। इस केसर को गरम दूध में मिलाएं और अच्छे से घोलें।

आवश्यकता अनुसार शहद डालें और फिर से अच्छे से मिलाएं। धीमी आंच पर रखें और दूध को आधे घंटे तक उबलने रखें, ताकि सभी स्वाद और गुण अच्छे से मिल जाएं। गरमा गरम केसर दूध को सर्दी, खांसी, और थकान में आराम प्रदान करने के लिए पी सकते हैं।

नियमितता:

  • हफ्ते में नियमित रूप से इस्तमाल इस्तमाल करें हो सके तो रात में सोने से पहले इसे उपयोग में लें।
  • एक दिन का गैप लेकर इस दूध का सेवन करें।

सावधानियां:

  • केसर की मात्रा को ध्यान में रखें और अधिकतम सुरक्षा के लिए एक निश्चित मात्रा निर्धारित करें।
  • गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे केसर का सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।

आज के इस आर्टिकल में आपने सर्दी-खांसी और जुकाम होने के कारण और उनसे  निजात पाने के आसान घरेलू (होम रेमेडीज) को जाना, जो आजमाए और वापरे गए है हम हेल्थ केयरिंग ( Heath Caring in hindi) से संबंधित इसी प्रकार की और जानकारियाँ आप तक पहुंचाते रहेंगे।

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