बच्चों की हाइट बढ़ाने के लिए करवाए यह 6 योगासन

(Yogasana for Increasing Height of Kids)

Synopsis: बच्चों की हाइट कैसे बढ़ाए ? हाइट बढ़ाने के योगासन (Yogasana for Increasing Height of Kids)

आजकल की बदलती लाइफ स्टाइल ने जहाँ माँ-बाप को भागता-दौड़ता बना दिया है तो वही बच्चों पर ध्यान न दें पाना भी एक परेशानी की वजह बनता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसमें कई पेरेंट्स अपने बच्चों की हाइट को लेकर अक्सर परेशान होते हुए दिखाई पड़ते है।

आज के समय में जहां देखो वहा बच्चे फिजिकल एक्टिविटी करते हुए कम ही दिखाई देते है। बच्चे आउटडोर गेम्स खेलना जैसे भूल से गए है क्यों कि उनकी जगह “मोबाइल्स” ने जो लें रखी है यही मेन कारण है कि बच्चें घंटो-घंटो मोबाइल में लगे रहते है ,गेम्स या रील्स देखते हुए अपना टाइम पास करते रहते है और दिनचर्या बस स्कूल से घर और घर से स्कूल बनकर ही रह जाती है। अगर आप भी अपने बच्चों की हाइट को लेकर अक्सर परेशान रहते है तो मेरे सवाल का यह आर्टिकल आपके लिए ही है।

बच्चों की हाइट कैसे बढ़ाए ?

(baccho ki hight kaise badhaye in hindi)

तो चलिए आपकी चिंता दूर करते है और बताते है ऐसे ही कुछ प्रमुख योगासनों के विषय में –

बच्चों की हाइट बढ़ाने के लिए आप बिना सप्लीमेंट्स दिए सिर्फ योग के जरिये अपने बढ़ती उम्र के बच्चों की हाइट बढ़ा सकते है।

हाइट बढ़ाने के योगासन

( Yogasana to increase hight in hindi)

 

1.

ताड़ासन

(Tadasana)

ताड़ासन जिसे माउंटेन पोज भी कहते है यह बच्चों की हाइट बढ़ाने के लिए एक अत्यंत प्रभावी योगासन है। इसमें बच्चे को पहले सावधान की स्थिति में सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को ऊपर की ओर खींचना होता है। इस आसन को करने से शरीर के मसल्स में खिंचाव होता है, जिससे हाइट बढ़ने में मदद मिलती है।

2.

सूर्य नमस्कार

(Surya Namaskar)

सूर्य नमस्कार 12 योगासन का सम्मिलन होता है जो शरीर के विभिन्न हिस्सों के लिए या यू कहे ही ओवरआल बॉडी कों स्ट्रेचिंग और मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाता है। आप नियमित रूप से सूर्य नमस्कार करने की आदत बच्चों में डाल सकते है जिससे वह पूरे दिन एनर्जेटिक महसूस करेंगे और हाइट बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

3.

वृक्षासन

(Vrikshasana)

वृक्षासन या ट्री पोज में बच्चे को एक पैर पर खड़े होकर बेलेन्स बनाना होता है तो वही दूसरे पैर को घुटने तक उठाकर सीधे खड़े पैर पर एड़ी से पंजे की तरफ रखना होता है। कम से कम 5 से 8 मिनट तक बैलेंस बनाने का ट्राय करवाए। यह संतुलन और कंसंट्रेशन को बढ़ाने के साथ-साथ हाइट बढ़ाने में भी मदद करता है।

4.

भुजंगासन

(Bhujangasana)

भुजंगासन या कोबरा पोज बच्चों के डाइजेस्टिव सिस्टम को मजबूत बनाता है तो वही रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने और हाइट बढ़ाने में सहायक होता है।

इस आसान को करने के लिए बच्चे को पेट के बल लेटकर अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को सांस लेते हए ऊपर उठाना होता है एवं सांस छोड़ते हुए नीचे लाना होता है।

इस प्रक्रिया को कम से कम 10 बार करवाए।

5.

उत्तानासन

(Uttanasana)

उत्तानासन में बच्चों को खड़े होकर आगे की ओर झुकना होता है और अपने हाथों से पैरों के अंगूठे को टच करने का प्रयास करना होता है जिससे शरीर के पीछे के हिस्से में खिंचाव आता है। यह आसन बच्चों की हाइट बढ़ाने में सहायक होता है।

6.

पश्चिमोत्तानासन

(Pashchimottanasana)

इस आसन में बच्चे को सीधे बैठकर अपने पैरों को सीधा फैलाकर हाथों की उंगलियों से पैरों के पंजे पकड़ते हुए आगे की ओर सिर गुठनों तक झुकाना होता है। इससे शरीर के पीछे के हिस्से में खिंचाव आता है और हाइट बढ़ने में मदद मिलती है।

नोट – जितना हो सके सुबह के समय शौच आदि से निर्वत होने के बाद ही आप यह सभी योगासन नियमित रूप से अपने बच्चों को करवाए।

7

अर्ध चक्रासन या हाफ व्हील पोज

अर्धचक्रासन, एक महत्वपूर्ण योग आसन है।

  • इस आसन को करने के लिए पहले दोनों पैरों पर सीधे खड़े होकर, दोनों हाथों को कुल्हें पर रखते हुए शरीर का आधा हिस्सा पीछे की और झुखाने का प्रयास करें और श्वास लें।
  • जितना संभव हो, कमर को पीछे की ओर झुकाते हुए हाथों को उठाकर पीछे की ओर ले जाएं।
  • इस अवस्था में कुछ सेकंड तक रुकें और सामान्य रूप से श्वास लें।
  • अब धीरे-धीरे वापिस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

लाभ

अर्धचक्रासन शरीर में लचीलापन और एनर्जी को बढ़ाने में मदद करता है। अर्धचक्रासन को “हाफ व्हील” पोज़ भी कहा जाता है अर्धचक्रासन करने के कई फायदे होते हैं, जैसे कि

  • रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाना,
  • पेट की मांसपेशियों को टोन करना,
  • शारीरिक व मानसिक तनाव को कम करना।
  • और सबसे महत्वपूर्ण हाइट बढ़ाना।

आप नियमित तौर पर इस आसन को करवा कर अपने बच्चों की हाइट बढ़वा सकते है।

8.

धनुर्रासन (बो पोज़)

धनुर्रासन में शरीर का पोज़ धनुष के आकर का दिखाई देता है

इसे करने के लिए पेट के बल सीधे लेट जाये।

  • फिर गुठनों को मोड़ते हुए पैरों के अंगूठो को दोनों हाथो की सहायता से पकड़ लें। आगे की तरफ से सर और चेस्ट का ऊपरी हिस्सा ऊपर उठाते हुए सांस भरते हुए ऊपर की और हाफ बॉडी को यू के आकर में बेंड करें। जो धनुष की तरह दिखाई देगा।
  • कुछ सेकड़ के लिए होल्ड करके रखें।
  • फिर सांस छोड़ते हुए पुनः पहली वाली स्थिति में आ जाये। शरीर को रिलैक्स करने दें।
  • इस प्रक्रिया को कम से कम 5 से 8 बार धोराये।

लाभ

  • धनुर्रासन शरीर को फेक्सिबल बनता है।
  • धनुर्रासन पेट पर जमी एक्स्ट्रा फैट को कम करने में हेल्पफुल होता है।
  • धनुर्रासन हाइट बढ़ाने में सहायक होता है।
  • जांघों, छाती, और कंधों की मांसपेशियों को टोन करता है।

9.

वीर भद्रासन

इस आसन का नाम वीरभद्र नामक एक महान योद्धा के नाम पर रखा गया है, जो कि भगवान शिव के एक अवतार थे। वीरभद्रासन से शरीर में संतुलन, शक्ति और स्थिरता बढ़ती है। वीरभद्रासन, जिसे वॉरियर पोज़ (Warrior Pose) भी कहा जाता है

  • अपने दाएँ पैर को 90 डिग्री पर मोड़ें और बाएँ पैर को हल्का अंदर की ओर घुमाएँ।
  • अपनी दोनों भुजाओं को कंधों के बराबर में, ज़मीन के समानांतर, सीधा फैलाएं।
  • श्वास लें और अपने दाएँ घुटने को मोड़ें, इस बात का ध्यान रखें कि घुटना टखने के सीध में हो।
  • अपने सिर को दाईं ओर घुमाएँ और सामने की ओर देखें।
  • इस स्थिति में 15 से 30 सेकंड तक रहें, और सामान्य रूप से श्वास लेते रहें।
  • श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में लौटें।
  • अब दूसरी दिशा में भी यही प्रक्रिया दोहराएँ।

लाभ

  • एक शक्तिशाली योगासन है जो योद्धा की तरह ताकत, स्थिरता, और साहस का प्रतीक है।
  • वीर भद्रासन हाइट बढ़ाने में सहायक होता है।

10.

सर्वांगासन

(Shoulder Stand)

सर्वांगासन एक प्रभावशाली योगासन है, जो शरीर के लगभग सभी अंगों पर काम करता है, इसलिए इसे सर्वांगासन कहा जाता है। यह आसन विशेष रूप से रीढ़, गर्दन, और कंधों के लिए फायदेमंद है, और यह शरीर की मुद्रा सुधारने और लंबाई बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

  • सबसे पहले पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं, अपने पैरों को साथ रखें और हाथों को शरीर के पास रखें, हथेलियाँ नीचे की ओर हों।
  • श्वास लेते हुए धीरे-धीरे अपने पैरों को एक साथ ऊपर की ओर उठाएं, ताकि वे 90 डिग्री के कोण पर आ जाएं।
  • अब हाथों की सहायता से अपनी कमर को उठाएं। अपनी कोहनियों को ज़मीन पर टिकाएं और दोनों हाथों से कमर को सहारा दें।
  • अपने पैरों और शरीर को एक सीधी रेखा में लाएं, ताकि आपके पैर, कूल्हे और पीठ एक सीध में हों। आपकी ठुड्डी छाती से टच होनी चाहिए।
  • ध्यान दें कि आपका पूरा भार कंधों और हाथों पर हो, गर्दन पर कोई दबाव न डालें।
  • इस आसन में 30 सेकंड से लेकर 2 मिनट तक रहें, और सामान्य रूप से श्वास लें। अपनी क्षमता के अनुसार समय को धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं।
  • आसन से बाहर आने के लिए –
  • धीरे-धीरे पैरों को नीचे की ओर लाएं और अपनी कमर को धीरे-धीरे ज़मीन पर वापस लाएं।
  • फिर पैरों को वापस ज़मीन पर ले जाएं और प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।

इन सभी योगासनों के अलावा आप बच्चों को पिज़्ज़ा और बर्गर से दूर रहने की हिदायत दें और जहां तक हो मल्टीग्रैन आटे का प्रयोग करें, सलाद खाने के लिए प्रेरित करें। यह बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाता है और हाइट बढ़ाने में सहायक है।

योग क्या है ? 5 महत्वपूर्ण प्राणायाम और उनका हमारे जीवन पर प्रभाव क्या है ?

(What is Yoga? 5 Important Pranayam and it’s effectiveness in Hindi)

Synopsis: योग क्या है? प्राणायाम क्या है ? 5 महत्वपूर्ण प्राणायाम और उनका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

मेरे सवाल के इस article में हम आपको बताने वाले है कि किस तरह आप योग एवं प्राणायाम (Yoga and Pranayam in hindi) के जरिये अपने दैनिक जीवन को सुखमय, आनंदमय एवं रोगमुक्त बना सकते है। लेकिन उससे पहले जान लेते है कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को…

वैसे तो प्राचीन काल से ही हम योग (Yoga) के बारे में सुनते आ रहे हैं, परंतु आज के समय में घर-घर तक योग को पहुंचाने का मुख्य कार्य “स्वामी रामदेव जी” ने ही किया है। इतना ही नहीं उन्होंने अपने जीवन का अमूल्य समय योग को ही दिया है और आज हम सभी योग, प्राणायाम को उनके माध्यम से ही जान पाए है। और यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं हैं।

अगर आप भी योग की महिमा से जुड़ना चाहते है अपने जीवन को रोगमुक्त, शांतिमय ,आनंदमय रखना चाहते है तो उनके द्वारा बताई गई अहम बातों को आप इस आर्टिकल के जरिये भी अपने जीवन में उतार सकते है।

जैसे –

  1. योग क्या है ?
  2. योग का हमारे जीवन पर प्रभाव क्या होता है ?
  3. क्या हमे नियमित रूप से योग करना चाहिए ?
  4. प्राणायाम क्या होता है ?
  5. प्राणायाम करने का सही तरीका क्या है ?
  6. कौन से मुख्य प्राणायाम है शरीर के लिए बेहद ही जरुरी ?
  7. क्या सिर्फ प्राणायाम की मदद से बड़ी से बड़ी बीमारियों को ठीक किया जा सकता है?

इन सभी सवालों के जवाबआपको मिलने वाले है क्यों कि अक्सर यही सब सवाल लोगों के मन में रहते है जब वह अपने जीवन में योग को शामिल करना चाहते है या फिर अपनाना चाहते है।

आइये एक-एक करके इन सभी प्रश्नो के जवाब हासिल करते है। ..

योग क्या है ? (What is Yoga in Hindi)

योग एक प्राचीन भारतीय विज्ञान संस्कृति  है जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए उपयोगी है। योग के माध्यम से हम अपने शरीर, मन, और आत्मा को संतुलित और संयमित बनाने का प्रयास करते हैं। एक संतुलित और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

योग के मुख्य अंग हैं (The main parts of Yoga in Hindi)

  • आसन (शारीरिक पोस्चर)
  • प्राणायाम (श्वास का नियंत्रण)
  • ध्यान (मन की एकाग्रता)
  • ध्यान (आत्म-अध्ययनयोग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है, बल्कि यह मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।

योग का हमारे जीवन पर प्रभाव क्या होता है? ( What is the effect of Yoga on our life)

अगर आप योग को पूरी तरह अपने जीवन में अपनाना चाहते है तो उसके लिए नियमित रूप से जल्दी उठकर , दैनिक कार्यो से निर्वित्त होकर सुबह-सुबह योग करें। योग की शुरुआत करने से पहले अपनी बॉडी को हल्का वार्म उप करे। इससे मांसपेशियाँ नरम होगी और हाथ पैरों का मोवमेंट्स भी आसानी से होगा।

योग करने का सही समय सुबह 5 बजे से 9 बजे तक है।

आप मांसपेशियों को सक्रीय करने के लिए सूक्ष्म प्राणायाम भी कर सकते है।

जैसे-

  • दोनों हाथो को सामने रखकर हाथों की दोनों कलाइयों की मुट्ठी बनाकर कुछ देर क्लॉकवाइज़ घुमाये कुछ देर एंटीक्लॉकवाइज घुमाये।
  • दोनों हाथों को कंधे पे रखकर कुछ देर क्लॉकवाइज़ घुमाये कुछ देर एंटीक्लॉकवाइज घुमाये।
  • इसी तरह पैरों को सामने रखके पंजों को कुछ देर क्लॉकवाइज़ घुमाये कुछ देर एंटीक्लॉकवाइज घुमाये।
  • पेरो की उंगलियों को अंदर बाहर करें।

क्या हमें नियमित रूप से योग करना चाहिए? (Should we do Yoga regularly)

अगर आप नियमित रूप से योग करते है तो आपका मन, सुख और शांति की तरफ आकर्षित होगा इतना ही नहीं आपको आपकी बॉडी हल्की महसूस होगी और दिनभर फ्रेशनेस और एनर्जी फील होगी। अपने शरीर को सुचारु रूप से चलाने के लिए योग तो नियमित रूप से करना ही चाहिए।

  • प्राणायाम क्या होता है? ( What is Pranayam in hindi)

    प्राणायाम योग का एक महत्वपूर्ण अंग है जो श्वास (सांसो) के नियंत्रण और प्राण के प्रवाह को संतुलित करने के लिए किया जाता है।

  • प्राणायाम करने का सही तरीका क्या है? ( What is the right way to do Pranayama in hindi)

    प्राणायाम में, आप अपने श्वास को नियंत्रित करते हैं, जैसे (सांस लेना और छोड़ना ) जिससे आपका मन शांत होता है प्राणायाम शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुधारता है। प्राणायाम के माध्यम से आप अपनी प्राण शक्ति को भी बढ़ा सकते हैं और आत्मा के अंश को जागृत कर सकते हैं।

  • कौन से मुख्य प्राणायाम शरीर के लिए बेहद ही जरुरी है? ( Which Pranayam are very important for the body in hindi)

    यहाँ 6 प्रमुख प्राणायाम शामिल हैं, जो एक विशेष तकनिकी पर काम करते है और हर प्राणायाम का एक अलग उद्देश्य है जो विभिन्न बीमारियों को ठीक करने में उपयोगी होते है।

    • भस्त्रिका प्राणायाम
    • कपालभाति प्राणायाम
    • अनुलोम-विलोम प्राणायाम
    • उज्जायी प्राणायाम
    • भ्रामरी प्राणायाम
    • शीतली/शीतकारी प्राणायाम।

    ये तकनीकें आत्म संवेदनशीलता को बढ़ाती हैं, मन को शांत करती हैं और सांत्वना प्रदान करती हैं।

    क्या सिर्फ प्राणायाम की मदद से बड़ी से बड़ी बीमारियों को ठीक किया जा सकता है?

  • भस्त्रिका प्राणायाम ( Bhastrika Pranayam in Hindi)

  • भस्त्रिका का अर्थ है धौंकनी अर्थात एक ऐसा प्राणायाम जिसमें लोहार की धौंकनी की तरह आवाज करते हुए वेगपूर्वक शुद्ध प्राणवायु को अन्दर लेते हैं और अशुद्ध वायु को बाहर फेंकते हैं। भस्त्रिका प्राणायाम के करने से विभिन्न बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। इस प्राणायाम से निम्नलिखित बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं जैसे
    • भस्त्रिका प्राणायाम से दमा का इलाज संभव है : भस्त्रिका प्राणायाम दमे की बीमारी के लिए लाभकारी हो सकता है और फेफड़ों को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
    • सांस की बीमारियाँ को ठीक किया जा सकता है भस्त्रिका प्राणायाम से : यह प्राणायाम सांस की समस्याओं जैसे कि श्वास रोग या ब्रोंकाइटिस को भी ठीक कर सकता है।
    • तनाव कम करने में कारगर भस्त्रिका प्राणायाम: भस्त्रिका प्राणायाम से मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है। अगर आप अपनी मानसिक स्थिति को स्थिर रखना चाहते है तो यह प्राणायाम आपके लिए बहुत ही फादेमंद है इससे मन शांत रहता है और सांसों पर नियंत्रण शरीर में ऑक्सीज़न से प्रवाह को आसान बनाता है।
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    भस्त्रिका प्राणायाम को निम्नलिखित तरीके से किया जाता है:

      • शांति प्राप्त करें: सबसे पहले, एक सुखासन में बैठें।
      • सबसे पहले सांस को अंदर फेफड़ो में भरें : अपनी नासिका से श्वास लेकर अपनी नाक को बंद करें।
      • उत्तेजक अवस्था: इसका मतलब है कि आपको अपने शरीर के सार्वभौमिक क्षेत्र में सांस लेनी होगी।
      • सांस छोड़ें: सांस को धीरे -धीरे से छोड़ें। यह ध्यान दें कि सांस को संवेदनशीलता के साथ छोड़ा जाए।
      • वापस से यही क्रिया दोहराते रहें। शुरुआत में कम से कम 10 से 15 मिनट जरूर करें।

इसे ध्यान और धैर्य से करें, और ध्यान दें कि आप इसे सीखने के लिए निरंतर प्रयास कर रहें है। यह सुनिश्चित करें कि आप इसे बिना किसी परेशानी के कर सकते हैं और अपने श्वास पर नियंत्रण कर सकते हैं।

2. कपालभाति प्राणायाम

(Kapalbhati Pranayama in Hindi)

कपालभाति प्राणायाम से भी निम्नलिखित बीमारियों को ठीक किया जा सकता है।

जैसे –

  • श्वासरोग(सांस )से जुड़ी बीमारिययों का इलाज कपालभाति प्राणायाम : कपालभाति प्राणायाम से श्वास रोगों जैसे कि “ अस्थमा, बीपी, ब्रोंकाइटिस” में आराम मिलता है।
  • दिल की बीमारियाँ ठीक करें कपालभाति प्राणायाम : इस प्राणायाम की मदद से हृदय के स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है, जिससे हृदय रोगों का जोखिम कम हो सकता है।
  • कपालभाति प्राणायाम दूर करें मस्तिष्क संबंधी समस्याएँ: कपालभाति प्राणायाम यदि आप करते है तो इससे मानसिक तनाव और मस्तिष्क को शांति देने में मदद मिलती है, जिससे अवसाद और चिंता जैसी समस्याएँ कम हो सकती हैं।
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कपालभाति प्राणायाम को निम्नलिखित तरीके से किया जाता है:

  • सबसे पहले, एक सुखासन या आसन में बैठें। अपने शरीर को एकाग्रचित्त रखें और मन को शांत करें।
  • प्राणायाम शुरू करने के पहले नासिका को साफ करें: अपनी नासिका से श्वास लें ताकि नासिका का मुख खुल जाए।
  • प्राणायाम की प्रक्रिया: अपनी श्वास को अंतर्निहित (अंदर की और लें )करें। सांस को धीरे-धीरे अपने नासिका से बाहर निकालें। इसके बाद, तेजी से अपने पेट को अंदर की ओर धकेलें।
  • फिर सांस निकालें: अपनी सांस को अंतर्निहित करने के बाद, आपको अपने पेट को धीरे-धीरे बाहर की ओर निकालना है। इसके दौरान, अपने नासिका को संरेखित रखें।
  • दोहराना: इस प्रक्रिया को कुछ समय तक जारी रखें, ध्यान रखते हुए कि सांस और पेट को सही ढंग से नियंत्रित किया जाता है। इस प्राणायाम को कम से कम 15 से 20 बार करें।

अच्छी प्रैक्टिस हो जाने के बाद समय को आधा घंटा या एक घंटे तक बढ़ा लें। इससे मोटापा नहीं बढ़ता और महिलाओं में PCOD की समस्या भी दूर होती है।

यह ध्यान और अभ्यास का काम है, इसलिए धैर्य और निरंतरता से इसे करते रहें। यदि आप प्राणायाम को सीख रहे हैं, तो एक अनुभवी योग शिक्षक से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।

3. अनुलोम-विलोम प्राणायाम

(Anulom-Vilom Pranayam in Hindi)

अनुलोम-विलोम प्राणायाम कई समस्याओं को ठीक करने में मदद कर सकता है। इस प्राणायाम को करने से निम्नलिखित बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं:

  • ब्लडप्रेशर ठीक करें अनुलोम-विलोम प्राणायाम : अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने से ब्लडप्रेशर को नियंत्रित किया सकता है और उच्च रक्तचाप (हाई ब्लडप्रेशर) से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकता है।
  • नींद की समस्या से दिलाये राहत अनुलोम-विलोम प्राणायाम : इस प्राणायाम का नियमित अभ्यास करे से नींद की समस्याएँ कम हो सकती हैं और अनिद्रा को दूर किया जा सकता है।
  • मानसिक तनाव कम करने के लिए करें अनुलोम-विलोम प्राणायाम : मानसिक तनाव को कम करने में अनुलोम-विलोम प्राणायाम मदद कर सकता है जो मन को शांति प्रदान करता है।
  • अस्थमा की बिमारी दूर करने में सहायक अनुलोम-विलोम प्राणायाम : यह प्राणायाम फेफड़ों को मजबूत करने में मदद करता है जिससे अस्थमा के लक्षणों को कम किया जा सकता है।
  • सांस संबंधी प्रॉब्लम्स में राहत दें अनुलोम-विलोम प्राणायाम : अनुलोम-विलोम प्राणायाम सांस की समस्याओं जैसे कि श्वास रोग या ब्रोंकाइटिस को भी ठीक कर सकता है
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अनुलोम-विलोम प्राणायाम को निम्नलिखित तरीके से किया जाता है:

  1. सबसे पहले, एक सुखासन या आसन में बैठें। अपने शरीर को सीधा करें और मन को शांत करें।
  2. नासिका को साफ रखे : अपनी नासिका से श्वास लें ताकि नासिका का मुख खुल जाए।
  3. प्राणायाम की प्रक्रिया: अब, आपको अपने दाहिने नासिका के माध्यम से अंतर्निहित (अंदर की और ) श्वास (सांस ) लेना है। ध्यान रखें कि आपका बायां नासिका बंद रहे।
  4. सांस को छोड़े : अब आपको अपने दाहिने नासिका को बंद करके बायां नासिका के माध्यम से सांस बाहर निकालनी है।
  5. दोहराएं: इस प्रक्रिया को कुछ समय तक जारी रखें, ध्यान देते हुए कि आप नियमित और समय अंतराल के साथ श्वास ले रहे हैं।

कम से कम आधा घंटा इस प्राणायाम को करें।

धैर्य और निरंतरता से इसे करते रहें। यदि आप प्राणायाम को सीख रहे हैं, तो एक अनुभवी योग शिक्षक से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।

4. उज्जायी प्राणायाम  (Ujjayi Pranayam in Hindi)

उज्जायी प्राणायाम की मदद से कई समस्याओं को ठीक करने में मदद मिलती है। इस प्राणायाम से निम्नलिखित बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं:

  • थायराइड समस्याएँ दूर करें उज्जायी प्राणायाम : जिन लोगों को थायराइड का प्रॉब्लम है, यह प्राणायाम थायराइड को संतुलित करने में मदद कर सकता है और थायराइड समस्याओं को कम कर सकता है।
  • उच्च रक्तचाप (हाई ब्लडप्रेशर) ठीक करें उज्जायी प्राणायाम : उज्जायी प्राणायाम से रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और उच्च रक्तचाप से जुड़ी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
  • उज्जायी प्राणायाम बुद्धिमत्ता को बढ़ाने में सहायक : यह प्राणायाम मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है और मन ,शरीर को शांति प्रदान कर सकता है, जिससे बुद्धिमत्ता और ध्यान की क्षमता बढ़ती है।
  • स्नायुशोथ कम करने में सहायक उज्जायी प्राणायाम : उज्जायी प्राणायाम शरीर के स्नायुशोथ को कम करने में मदद कर सकता है और संबंधित दर्द को राहत प्रदान कर सकता है।
  • श्वास रोग से मिले राहत उज्जायी प्राणायाम से : उज्जायी प्राणायाम फेफड़ों को मजबूत बनाता है और श्वास रोगों को कम कर सकता है।
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उज्जायी प्राणायाम को निम्नलिखित तरीके से किया जाता है:

  1. स्थिर सबसे पहले, आरामपूर्वक बैठें या आसन में बैठें। आपकी पीठ सीधी होनी चाहिए और कंधे नीचे होने चाहिए।
  2. गहरी सांस लें: अपनी नासिका से श्वास लें और ध्यान दें कि आपकी सांसें धीरे-धीरे हो रही हैं।
  3. गला बंद करें: सांस को धरने के बाद, अपने गले को बंद करें, लेकिन अपनी नाक से श्वास लेने का प्रयास “न” करें।
  4. ध्वनि उत्पन्न करें: अब, अपने गले को बंद करके सांस लेते हुए, सांस को धीरे-धीरे छोड़ते समय, अपने गले में “हाँ” की ध्वनि उत्पन्न करें।
  5. सांस छोड़ें: ध्यान दें कि सांस को धीरे-धीरे छोड़ें और ध्यान दें कि आपकी सांस का प्रवाह हो।

उज्जायी प्राणायाम को सीखने में समय लगता है, लेकिन नियमित अभ्यास से आप इसे सीख सकते हैं। यदि संभव हो, तो एक अनुभवी योग गुरु के मार्गदर्शन में इसे सीखना फायदेमंद हो सकता है।

5. भ्रामरी प्राणायाम  (Bhramari Pranayam in Hindi)

भ्रामरी प्राणायाम मानसिक शांति से जुड़ा प्राणायाम है इससे निम्नलिखित बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं:

  • भ्रामरी प्राणायाम से तनाव और चिंता दूर करें : यह प्राणायाम मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है।
  • उच्च रक्तचाप कम करे भ्रामरी प्राणायाम : लगभग हर प्राणयाम से बीपी कंट्रोल होता है जिसमे भ्रामरी प्राणायाम भी शामिल है जो रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है और हाई ब्लडप्रेशर से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकता है।
  • मानसिक तनाव को शांत करे अवसाद से बचाये भ्रामरी प्राणायाम : यह प्राणायाम मानसिक तनाव को कम करने,अवसाद से बचाने में मदद करता है और मन को शांति प्रदान कर सकता है।
  • भ्रामरी प्राणायाम से मानसिक तत्वों का संतुलन सुधरता है : यह प्राणायाम मानसिक तत्वों को संतुलित करने में मदद करता है और मन की स्थिति को स्थिर बनाता है।
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यह प्राणायाम न केवल बड़ो के लिए फायदेमंद है बल्कि बच्चों के लिए भी बहुत ही पॉवरफुल प्राणयाम है। दिमाग को और ज्यादा सक्रीय, तीव्र बनाता है एवं मेमोरी कॉन्सेंट्रेशन भी बढ़ाता है..

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